बिजनौर पटाखा फैक्ट्री हादसे के आरोपी को हाईकोर्ट से जमानत:प्रत्यक्षदर्शी और पुष्टिकारक साक्ष्य नहीं मिलने पर कोर्ट ने दी राहत, 1-महीने से जेल में बंद है आरोपी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजनौर के शेरकोट में हुए पटाखा फैक्ट्री हादसे के मामले में आरोपी मोहम्मद यूसुफ की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। कोर्ट ने कहा कि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और प्रथमदृष्टया ऐसा कोई पुष्टिकारक साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं है, जिससे आरोपी को घटना से जोड़ा जा सके। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक वर्मा ने दिया। मामले के अनुसार, बिजनौर के शेरकोट थाने में आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 118(2), 105, 288 और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी एक अक्टूबर 2026 से जेल में बंद है। उसकी ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि घटना के समय वह दूसरे मुकदमे में जेल में बंद था। उसका दिया फायर वर्क्स और टीके फायर वर्क्स से कोई संबंध नहीं है। वह बजरंग फायर वर्क्स में मजदूर के रूप में काम करता था। न तो वह किसी फैक्ट्री का मालिक है और न ही संचालक। उसे केवल संदेह के आधार पर इस मामले में आरोपी बनाया गया है। अधिवक्ता ने यह भी बताया कि दूसरे मुकदमे में हाईकोर्ट उसे 9 अक्टूबर 2026 को ही जमानत दे चुका है। राज्य सरकार की ओर से जमानत अर्जी का विरोध किया गया, लेकिन याची की दलीलों का संतोषजनक खंडन नहीं किया जा सका। कोर्ट ने पाया कि आरोपी को घटना से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्षदर्शी या पुष्टिकारक साक्ष्य नहीं है। वह करीब एक महीने से जेल में बंद है और मुकदमे का जल्द निस्तारण होने की संभावना भी नहीं है। इसके अलावा जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी के साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका का कोई ठोस आधार नहीं है। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी की जमानत अर्जी मंजूर कर उसे रिहा करने का आदेश दिया।
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