गिरफ्तारी के कारणों में पुलिस ने की हेराफेरी:हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश, दस्तावेज और कोर्ट में पेश रिकॉर्ड में मिला अंतर
। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी के कारण बताने वाले दस्तावेजों में हेराफेरी करने पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने गिरफ्तारी के कारणों से जुड़े दस्तावेज में बाद में महत्वपूर्ण तथ्य जोड़कर गिरफ्तारी को सही ठहराने की कोशिश की। इसे कानून के खिलाफ मानते हुए कोर्ट ने याची मोहम्मद यासीन की गिरफ्तारी अवैध घोषित कर दी और उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, यह राहत तभी मिलेगी, जब वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने चार नवंबर को याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामला फर्रुखाबाद का है। याची पर शिकायतकर्ता की बेटी को प्रताड़ित करने का आरोप था। आरोप था कि प्रताड़ना से परेशान होकर युवती ने आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने याची की गिरफ्तारी 14 सितंबर 2026 को दिखाई थी, जबकि उसका कहना था कि वह 13 सितंबर को अपने अधिवक्ता के साथ खुद थाने पहुंचकर जांच में शामिल हुआ था। उसी दिन से वह पुलिस हिरासत में था। दस्तावेजों के मिलान में सामने आई हेराफेरी सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि गिरफ्तारी के कारण और गिरफ्तारी मेमो अलग-अलग तैयार कर 14 सितंबर को याची को दिए गए थे। इन दस्तावेजों पर उसके हस्ताक्षर भी हैं। हालांकि, कोर्ट ने पुलिस की ओर से पेश दस्तावेजों और याची को दिए गए दस्तावेजों का मिलान किया तो उनमें गंभीर अंतर मिला। याची को दिए गए गिरफ्तारी के कारणों वाले दस्तावेज में केवल बीएनएस की धारा 108 का उल्लेख था। उसमें यह नहीं बताया गया था कि उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज है और जांच में ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे युवती की आत्महत्या का कारण प्रताड़ना होना सामने आया है। जबकि पुलिस ने कोर्ट में जो दस्तावेज पेश किए, उनमें ये तथ्य दर्ज थे। जांच अधिकारी के खिलाफ FIR का आदेश कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों से स्पष्ट है कि गिरफ्तारी के कारणों वाले दस्तावेज में बाद में बदलाव किया गया। इसके जरिए रिमांड और जमानत की कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिश की गई। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि गिरफ्तारी के कारणों और गिरफ्तारी मेमो को सही ठहराने के लिए साक्ष्य गढ़ने की पुलिस की ऐसी कार्रवाई निंदनीय है। कोर्ट ने गिरफ्तारी को अवैध घोषित करते हुए पुलिस अधीक्षक फर्रुखाबाद को संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ बीएनएस के अध्याय 14 के तहत एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है। साथ ही सात दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
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