दीवाली पर दीये बनाने वालों के घर अंधेरा:चाइना आइटम ने छीनी चमक, मिट्टी शिल्पकार बोले-आप खरीदें तो हमारा घर भी रोशन हो सके
दीपावली खुशी और रोशनी का त्योहार है, लेकिन इस बार मिट्टी के दीये बनाने वालों के लिए यह त्योहार फीका दिखाई दे रहा है। शहर में लोग चाइना के आइटम और लाइटों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जिसके चलते मिट्टी के दीयों की बिक्री काफी कम हो गई है। पंचकुइयां स्थित दीये बनाने वालों ने बताया कि इस बार दीपावली कोई खास नजर नहीं आ रही है। पिछले साल के मुकाबले इस बार बाजार काफी डाउन है। पहले जिनके पास थोक के ऑर्डर लगे रहते थे, इस बार ज्यादा ऑर्डर नहीं आए हैं। कुछ ही लोगों के ऑर्डर आए हैं। महंगाई और घटती मांग के चलते दीये बनाने वालों को थोक में रेट गिराने पड़े हैं। पिछले साल 60 से 70 रुपये सैकड़ा दीये बिक रहे थे, वहीं अब 50 रुपये में सौ दीये मिल रहे हैं। यानी थोक में करीब एक रुपये के दो दीये मिल रहे हैं। इसके बाद भी खरीदार कम हैं। दीये बनाने वालों का कहना है कि लोगों ने मिट्टी के दीये जलाना छोड़ दिया है। अब लोग लाइट या मोमबत्ती का ज्यादा प्रयोग करते हैं, जिसके चलते दीयों की बिक्री लगातार कम होती जा रही है। जबकि दीये बाकी चीजों से सस्ते पड़ते हैं और पर्यावरण के लिए भी अच्छे हैं। कुम्हारों ने बताया कि महीनों पहले से दीये बनाने का काम शुरू हो जाता है। मिट्टी लाना, सानना, चाक पर दीये बनाना, सुखाना और पकाना, इसमें काफी मेहनत लगती है। पूरा परिवार इस काम में लगा रहता है। उम्मीद रहती है कि दिवाली पर अच्छी कमाई होगी, लेकिन इस बार हालात निराश करने वाले हैं। पहले हर घर में मिट्टी के दीये जलते थे। अब बड़े घरों में भी सिर्फ सजावट के लिए दो-चार दीये जलाए जाते हैं। बाकी पूरा घर लाइटों से जगमगाता है। बच्चों को भी अब दीयों से ज्यादा चाइनीज लाइटें पसंद आती हैं। दुकानदारों ने लोगों से अपील की है कि इस दिवाली चाइनीज आइटम की जगह मिट्टी के दीये खरीदें, ताकि कुम्हारों के घर भी रोशन हो सकें।
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