कानपुर में वारिस भर्ती मरीज, लावरिस मौत:बेटे का आरोप- पिता को तलाशने पर डॉक्टरों ने कहा, घर चले गए; चौकी पहुंचने पर मर्च्युरी में शव मिला

Oct 29, 2026 - 20:51
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कानपुर में वारिस भर्ती मरीज, लावरिस मौत:बेटे का आरोप- पिता को तलाशने पर डॉक्टरों ने कहा, घर चले गए; चौकी पहुंचने पर मर्च्युरी में शव मिला
कानपुर के हैलट अस्पताल में मरीजों की देखरेख और रिकॉर्ड व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल में भर्ती 61 वर्षीय मरीज की मौत के बाद उनका शव लावारिस के रूप में मर्च्युरी में रखवा दिया गया। उधर, परिजन अस्पताल में भर्ती मरीज को तलाशने के लिए दो दिन तक भटकते रहे। बेटे का आरोप है कि पिता के बारे में पूछने पर डॉक्टरों और कर्मचारियों ने उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। यहां तक कि उनसे कहा गया कि उनके पिता घर चले गए हैं। काफी तलाश के बाद गुरुवार को जब परिजन हैलट चौकी पहुंचे, तब उन्हें मर्च्युरी में एक अज्ञात व्यक्ति का शव रखे होने की जानकारी मिली। मर्च्युरी में शव देखने पर परिजनों ने उसकी पहचान अपने पिता नईम बेग के रूप में की। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। अब विस्तार से पूरा मामला जानिए… किदवई नगर निवासी 61 वर्षीय नईम बेग मानसिक रूप से बीमार थे। उनके परिवार में पत्नी मलका, दो बेटे नदीम और नसीम तथा दो बेटियां हैं। बेटे नदीम के मुताबिक, उनके पिता के पैर में संक्रमण हो गया था। इसके चलते 27 सितंबर को उनके भाई नसीम ने उन्हें हैलट अस्पताल में भर्ती कराया था। उनका इलाज डॉ. उदित पटेल की देखरेख में चल रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि अस्पताल में इलाज से उनकी हालत में सुधार होगा, लेकिन उनकी मौत के बाद शव की जानकारी न मिलने से परिजनों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल पहुंचे तो पिता नहीं मिले नदीम ने बताया कि 26 अक्टूबर को परिवार के लोग उनके पिता को अस्पताल में छोड़कर घर चले गए थे। अगले दिन यानी 27 अक्टूबर को जब वे अस्पताल पहुंचे तो पिता अपने बेड पर नहीं मिले। उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों से उनके बारे में जानकारी करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। परिजन को यह भी नहीं बताया गया कि मरीज को कहां ले जाया गया है या उनकी हालत कैसी है। परिवार के लोग अस्पताल के अलग-अलग स्थानों पर पिता को तलाशते रहे। उन्हें उम्मीद थी कि शायद उन्हें किसी दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया होगा या किसी अन्य स्थान पर इलाज चल रहा होगा। हालांकि, काफी प्रयास के बावजूद नईम बेग के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद परिजन अगले दिन 28 अक्टूबर को भी अस्पताल पहुंचे और उनके बारे में पता लगाने की कोशिश की, लेकिन तब भी उन्हें पिता का कोई सुराग नहीं मिला। हैलट चौकी पहुंचे तो मर्च्युरी में मिला शव लगातार दो दिन तक अस्पताल में तलाश करने के बाद गुरुवार को परिजन हैलट चौकी पहुंचे और पुलिस से नईम बेग के बारे में जानकारी मांगी। यहां उन्हें अस्पताल की मर्च्युरी में एक अज्ञात पुरुष का शव रखे होने की जानकारी मिली। इसके बाद परिजन मर्च्युरी पहुंचे। वहां शव देखने पर उन्होंने उसकी पहचान अपने पिता के रूप में की। जिस पिता को परिवार अस्पताल के वार्ड और परिसर में तलाश रहा था, उनका शव मर्च्युरी में मिलने से परिजन स्तब्ध रह गए। नदीम का आरोप है कि उनके पिता को अस्पताल में नाम और पहचान के साथ भर्ती कराया गया था। इसके बावजूद उनकी मौत के बाद शव को अज्ञात व्यक्ति के रूप में मर्च्युरी में रखवा दिया गया। परिवार का कहना है कि यदि अस्पताल प्रशासन समय रहते उन्हें मरीज की मौत की जानकारी दे देता, तो उन्हें दो दिन तक इस तरह भटकना नहीं पड़ता। भर्ती की तारीख को लेकर भी सवाल परिजनों ने अस्पताल के रिकॉर्ड में भर्ती की तारीख को लेकर भी सवाल उठाए हैं। नदीम के मुताबिक, उनके पिता को 27 सितंबर को भर्ती कराया गया था, लेकिन अस्पताल प्रशासन के रिकॉर्ड में उनकी भर्ती की तारीख 18 सितंबर दर्ज की गई। परिवार का आरोप है कि भर्ती की तारीख में इस अंतर और शव को अज्ञात के रूप में दर्ज किए जाने के कारण उन्हें पिता की मौत की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी। मामले में अस्पताल की भर्ती व्यवस्था, मरीज की पहचान से जुड़े रिकॉर्ड और मौत के बाद शव को मर्च्युरी भेजने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। परिजन यह जानना चाहते हैं कि नाम-पते के साथ भर्ती मरीज की मौत के बाद उनकी पहचान की पुष्टि क्यों नहीं की गई और परिवार को समय रहते सूचना क्यों नहीं दी गई। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि मरीज की मौत किन परिस्थितियों में हुई और अस्पताल के रिकॉर्ड में भर्ती की तारीख अलग दर्ज होने तथा शव को अज्ञात के रूप में रखे जाने के पीछे क्या कारण रहे। मामले में अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आने पर ही लापरवाही के आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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