प्रोफेसरों ने खराब सड़कों को लेकर उल्लू पूजन किया:शाहजहांपुर में तस्वीर गर्रा नदी में विसर्जित की, बोले- पिछले साल ट्रंप पर पूजन किया था
शाहजहांपुर शहर की बदहाल सड़कों और नगर निगम में भ्रष्टाचार के विरोध में शनिवार सुबह प्रोफेसरों ने अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। गांधी पार्क में सुबह करीब 10 बजे विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, डॉक्टरों और इंजीनियरों ने उल्लू पूजन किया। उल्लू की तस्वीर को गर्रा नदी में विसर्जित किया। इस दौरान उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि निगम पर उल्लू बैठा है और वहां सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है। हिस्टोरियन विकास खुराना ने आरोप लगाया कि शहर को सजाने में लगाई गई 800 रुपए की तितली 16 हजार रुपए में लगाई गई। उन्होंने कहा कि जिस समस्या को लेकर उल्लू पूजन किया जाता है, वह अगले साल तक खत्म हो जाती है। पिछले साल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर पूजन किया गया था। उनके मुताबिक, एक साल के भीतर ट्रंप चुनाव हार गए। अगले साल किसी दूसरे मुद्दे को लेकर उल्लू पूजन किया जाएगा। 18 साल से अलग-अलग मुद्दों पर कर रहे पूजन प्रोफेसरों के मुताबिक, पिछले 18 साल से हर वर्ष अलग-अलग थीम पर उल्लू पूजन किया जा रहा है। अब तक भ्रष्टाचार, महंगाई और केंद्र सरकार की नीतियों समेत 18 मुद्दों को इसका विषय बनाया जा चुका है। मुलायम सिंह यादव के परिवार में तनाव के समय भी उस विवाद को खत्म करने की कामना के साथ पूजन किया गया था। इतिहासकार विकास खुराना ने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, डॉक्टर और इंजीनियर समाज में फैली बुराइयों के खिलाफ लोगों को जागरूक करने और उनमें चेतना जगाने के लिए यह आयोजन करते हैं। हर साल मौजूदा परिस्थितियों और समस्याओं को ही पूजन की थीम बनाया जाता है। कविता के जरिए नगर निगम और बदहाल सड़कों पर तंज पूजन के दौरान प्रोफेसरों ने नगर निगम और शहर की खराब सड़कों पर व्यंग्य भी किया। उन्होंने कहा- 'निगम की छत पर बैठकर उल्लू मंद-मंद मुस्काए। सीवर ऐसी डालो, सड़कें सब खुद जाएं। गलियां सब उखाड़ दो, बचे न एको रोड।' उन्होंने घंटाघर, केरूगंज, अंटा, स्टेशन और बरेली मोड़ समेत शहर के प्रमुख इलाकों का जिक्र करते हुए सड़कों पर गड्ढों की समस्या उठाई। कविता के जरिए उन्होंने तंज कसा कि सड़कों में गड्ढे हैं और गड्ढों में सड़कें ढूंढनी पड़ रही हैं। इससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वायरल वीडियो और गंगाजल के मुद्दे पर भी कसा तंज कार्यक्रम के दौरान एक डॉक्टर ने वायरल वीडियो और गंगाजल से जुड़े विवाद पर भी व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि उनके शागिर्द पहले सभी को हक दिलाने की बात करते थे, लेकिन अब गंगाजल के साथ जलजला लाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गंगाजल को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन उनके जवाब नहीं दिए जा रहे हैं। गंगाजली की सौगंध भी सवालों के घेरे में है। बोले- समस्या खत्म होने की उम्मीद में करते हैं पूजन इतिहासकार विकास खुराना ने कहा कि पिछले 18 वर्षों से यह आयोजन समाज में फैली बुराइयों और समस्याओं के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध का माध्यम बना हुआ है। हर साल किसी एक समसामयिक मुद्दे को चुनकर उल्लू पूजन किया जाता है। उनका दावा है कि जिस समस्या को लेकर पूजन किया जाता है, वह अगले साल तक खत्म हो जाती है। -------------------------------------- ये खबर भी पढ़ेंः- अयोध्या में महिलाएं सिर पर मटके रखकर झूमीं:ढोल-मंजीरों की थाप पर नाचे पुरुष, देखें रंग-बिरंगी पोशाकों में कलाकारों का सांस्कृतिक नृत्य अयोध्या में दीपोत्सव से पहले कलाकारों ने सांस्कृतिक नृत्य के जरिए पारंपरिक छटा बिखेरी. महिलाएं मटके सिर पर रखकर, तो पुरुष ढोल-मंजीरों की थाप पर गाते हुए झूमे. वीडियो देखने के लिए क्लिक करें…
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