प्रसूता की मौत के बाद हाथापाई-हंगामे में 54 पर FIR:अमरोहा में गलत डिग्री से इलाज करने पर डॉक्टर पर भी केस
अमरोहा रोड स्थित नेकबंधु अस्पताल में प्रसव के दौरान ऑपरेशन के बाद विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना से नाराज परिजनों और स्थानीय लोगों ने शुक्रवार को अस्पताल के बाहर सड़क पर जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारी संबंधित डॉक्टर को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे। इस दौरान एम्बुलेंस और मोटरसाइकिलें सड़क के बीच खड़ी कर यातायात रोक दिया गया। जाम खुलवाने पहुंची पुलिस के साथ हाथापाई और सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप है। पुलिस ने इस मामले में 14 नामजद समेत करीब 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, विवाहिता के भाई की शिकायत पर अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ भी अलग से मुकदमा दर्ज किया गया है। परिजनों ने अस्पताल में इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही बरतने और डॉक्टर की योग्यता को लेकर सवाल उठाए हैं। पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है। 5 नवंबर को डिलीवरी के लिए अस्पताल में कराया था भर्ती पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, मृतका पायल मूल रूप से रामपुर जिले के शाहबाद क्षेत्र की रहने वाली थी। उसके भाई महेश कुमार पुत्र पप्पू सिंह ने बताया कि 5 नवंबर 2026 को पायल की डिलीवरी होनी थी। इसके लिए परिजनों ने उसे मंडी धनौरा के अमरोहा रोड स्थित नेकबंधु अस्पताल में भर्ती कराया था। आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टर सलमान, अंकित अली वारिश, प्रभा और अन्य स्टाफ ने बिना पर्याप्त विशेषज्ञता के ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद पायल की हालत बिगड़ने लगी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में उसकी स्थिति संभालने के बजाय 6 नवंबर की सुबह करीब 4 बजे उसे चौधरपुर स्थित जीवन (24x7) अस्पताल रेफर किया जाने लगा। हालांकि, अस्पताल से निकलने के कुछ ही देर बाद रास्ते में पायल की मौत हो गई। आयुर्वेद की डिग्री से हो रहा था एलौपैथिक इलाज मृतका के भाई महेश कुमार ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि बहन की मौत के बाद उन्होंने अस्पताल का बाहरी बोर्ड और संबंधित दस्तावेज देखे। इसके बाद उन्हें डॉक्टर की शैक्षणिक योग्यता की जानकारी हुई। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर सलमान के पास आयुर्वेद की डिग्री है, लेकिन वह एलोपैथिक पद्धति से प्रसव और बड़े ऑपरेशन कर रहे थे। उनका यह भी आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने डॉक्टरों की योग्यता और इलाज की व्यवस्था के बारे में सही जानकारी नहीं दी। परिजनों ने इसे गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। डॉक्टर को बुलाने की मांग पर लगाया जाम शुक्रवार को पायल की मौत से नाराज परिजन और अन्य लोग नेकबंधु अस्पताल के बाहर एकत्र हो गए। उन्होंने संबंधित डॉक्टर को मौके पर बुलाने की मांग करते हुए सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने एम्बुलेंस और कई मोटरसाइकिलें सड़क के बीच खड़ी कर दीं, जिससे यातायात बाधित हो गया। सूचना मिलने पर मंडी धनौरा पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर जाम खुलवाने का प्रयास किया। क्षेत्राधिकारी अंजलि कटारिया भी मौके पर पहुंचीं। पुलिस के मुताबिक, लोगों ने जाम हटाने से इनकार कर दिया। इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की गई और सरकारी कार्य में बाधा डाली गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। इसके बाद पुलिस ने मौके पर स्थिति संभाली और जाम खुलवाया। पुलिसकर्मी की तहरीर पर 14 नामजद समेत अज्ञात लोगों पर केस मंडी धनौरा थाने के उपनिरीक्षक नीरज कुमार की तहरीर पर पुलिस ने सौरभ, अभिषेक, शिवम, कार्तिक, बोबी, नितिन, अरुण, गौरव, सुरेश, राजकुमार, मुकुल, विनीत, महेश और पप्पू समेत 14 नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इसके अलावा करीब 10 अज्ञात महिलाओं और 30 अज्ञात पुरुषों को भी आरोपी बनाया गया है। एफआईआर के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191(2), 352, 351(3), 126(2), 132 और 7 सीएलए एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब अन्य आरोपियों की पहचान करने और उनकी तलाश में जुटी है। दो अलग-अलग मामलों में जांच कर रही पुलिस इस पूरे मामले में पुलिस के सामने दो अलग-अलग पहलुओं की जांच है। एक तरफ प्रसूता की मौत के मामले में अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों पर लगाए गए चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की जांच की जा रही है। दूसरी तरफ जाम लगाने, पुलिस से हाथापाई और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। अब जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, इलाज से जुड़े दस्तावेज, ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता और अस्पताल की वैधानिक स्थिति अहम होगी। फिलहाल पुलिस ने दोनों मामलों में मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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