प्रयागराज लॉ यूनिवर्सिटी में 11वें वित्त नियंत्रक की तैनाती:पहले कुलपति का 70 हजार का एकेडमिक भत्ता रोक चुके, अब दोबारा मिली जिम्मेदारी
प्रयागराज की डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में वित्त नियंत्रकों के लगातार बदलने का सिलसिला थम नहीं रहा है। वर्ष 2024 में शुरू हुई यूनिवर्सिटी में दो साल के भीतर 11वें वित्त नियंत्रक की तैनाती का आदेश जारी हुआ है। नए वित्त नियंत्रक सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी पहले भी यहां तैनात रह चुके हैं। अपने पिछले कार्यकाल में उन्होंने कुलपति डॉ. ऊषा टंडन को मिलने वाले 70 हजार रुपए के एकेडमिक भत्ते पर आपत्ति जताते हुए भुगतान रोक दिया था। अब दोबारा वित्तीय जिम्मेदारी सौंपे जाने के बावजूद उनके कार्यभार ग्रहण करने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। 15 अक्टूबर को कार्यभार ग्रहण करने का आदेश जारी हुआ था। उन्होंने इसकी सूचना कुलपति को भी दी, लेकिन उनके पास अब तक वित्तीय स्वीकृति के लिए कोई फाइल नहीं पहुंची है। बताया जा रहा है कि उन्हें औपचारिक रूप से कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया है। पहले रोक चुके हैं कुलपति का 70 हजार का भत्ता सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने अपने पिछले कार्यकाल में कुलपति के एकेडमिक भत्ते पर आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि कुलपति को वेतन के अतिरिक्त इस मद में भुगतान नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर उन्होंने 70 हजार रुपए का भत्ता रोक दिया था। अब उसी अधिकारी को दोबारा वित्त नियंत्रक की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद विश्वविद्यालय में वित्तीय कामकाज को लेकर चर्चा तेज है। हालांकि, इस बार कार्यभार ग्रहण करने और वित्तीय फाइलों के निस्तारण की स्थिति पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। तीन संस्थानों का प्रभार, लॉ यूनिवर्सिटी की फाइलें नहीं पहुंचीं सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी के पास राजेंद्र प्रसाद रज्जू भैया राज्य विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा निदेशालय का भी प्रभार है। बताया जा रहा है कि इसी वजह से वह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय से संबंधित फाइलें निदेशालय में मंगवाई थीं, लेकिन स्वीकृति के लिए उनके पास कोई फाइल नहीं पहुंची। इससे वित्त नियंत्रक की तैनाती के आदेश के बावजूद वित्तीय कामकाज शुरू होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 10वें वित्त नियंत्रक महीनेभर भी नहीं टिके विश्वविद्यालय में इससे पहले तैनात 10वें वित्त नियंत्रक रविंद्र सिंह आर्य 7 सितंबर 2026 को गोरखपुर से स्थानांतरित होकर आए थे। लेकिन एक महीने से भी कम समय में वह मेडिकल लीव पर चले गए। उनके अवकाश पर जाने के बाद वित्तीय कामकाज प्रभावित होने की बात सामने आई थी। शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन तथा विभिन्न बिलों के भुगतान को लेकर भी सवाल उठे थे। नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों के वेतन का मामला भी लंबित बताया जा रहा है। रजिस्ट्रार मेडिकल लीव पर, विधि विभागाध्यक्ष निलंबित विश्वविद्यालय में प्रशासनिक स्तर पर भी विवाद सामने आते रहे हैं। रजिस्ट्रार वरुण पांडेय और विधि विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक शर्मा के मेडिकल अवकाश पर जाने के बाद संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। कुलपति ने डॉ. दीपक शर्मा को निलंबित भी कर दिया है। दोनों की ओर से कुलपति की कार्यशैली पर आरोप लगाए गए थे। विश्वविद्यालय में नियुक्तियों और वित्तीय निर्णयों को लेकर भी पहले से विवाद की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में वित्त नियंत्रकों की लगातार अदला-बदली और नए वित्त नियंत्रक के पास फाइलें नहीं पहुंचने का मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर रहा है। किराए के भवन में चल रही यूनिवर्सिटी, हर महीने 7 लाख खर्च वर्ष 2024 में शुरू हुई नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी अब तक अपने स्थायी भवन में संचालित नहीं हो रही है। फिलहाल इसका संचालन फाफामऊ के गोहरी स्थित एक कॉलेज परिसर में किया जा रहा है। इसके लिए हर महीने 7 लाख रुपए किराया दिया जा रहा है। वित्त नियंत्रकों के लगातार बदलने, वेतन और बिलों के भुगतान से जुड़े सवालों के बीच अब निगाहें इस पर हैं कि नए वित्त नियंत्रक को औपचारिक रूप से कार्यभार कब सौंपा जाएगा और वित्तीय फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया कब शुरू होगी। इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
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