सहारनपुर में एक साथ जलीं मां-बेटे-बहू की चिताएं:देहरादून हादसे में कपूर परिवार की 3 पीढ़ियां खत्म
सहारनपुर में जिस घर में दिवाली की तैयारियां चल रही थीं, वहां गुरुवार शाम एक साथ तीन अर्थियां उठीं। देहरादून सड़क हादसे में जान गंवाने वाले आयकर विभाग में तैनात एडवोकेट विश्वेष कपूर, उनकी पत्नी निशा आनंद कपूर और मां किरण कपूर के शव जब घर पहुंचे तो परिवार और पड़ोसियों की आंखें नम हो गईं। घर पर दिवाली की झालरें लगी थीं। बेटे माहेर के लिए खरीदी गई पटाखों की लड़ी भी रखी थी। लेकिन जिस परिवार ने साथ मिलकर त्योहार मनाने की तैयारी की थी, उसकी खुशियां एक हादसे में उजड़ गईं। गुरुवार शाम करीब 4:30 बजे तीनों के शव सहारनपुर स्थित गोकुल एंक्लेव कॉलोनी के घर पहुंचे। कुछ देर बाद तीनों की अर्थियां एक साथ उठीं। अंतिम संस्कार के दौरान तीनों चिताएं भी एक साथ जलीं। एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों को इस तरह विदा होते देख हर कोई स्तब्ध था। इस हादसे में विश्वेष और निशा का छह साल का बेटा माहेर गंभीर रूप से घायल हुआ है। उसने एक ही हादसे में पिता, मां और दादी को खो दिया। कार चालक नीरज की भी मौत हो गई। दिवाली की खरीदारी कर देहरादून जा रहा था परिवार विश्वेष कपूर परिवार के साथ गोकुल एंक्लेव कॉलोनी में रहते थे। बुधवार को वह पत्नी निशा, मां किरण, छह साल के बेटे माहेर और कार चालक नीरज के साथ देहरादून जा रहे थे। परिवार चमन विहार फेस में रहने वाले विश्वेष के छोटे भाई दीपेश कपूर से मिलने निकला था। दीपेश की पत्नी गर्भवती हैं। परिवार दिवाली की खरीदारी करके निकला था। कार में त्योहार के उपहार और खरीदारी का सामान भी रखा था। बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे देहरादून के मोहब्बेवाला चौक स्थित साईं मंदिर के पास अचानक एक अनियंत्रित कंटेनर ट्रक कार पर पलट गया। ट्रक में प्लास्टिक के दानों से भरे कट्टे लदे थे। कंटेनर गिरने से कार की छत और बॉडी बुरी तरह पिचक गई। कार से बच्चे के रोने की आवाज आई, तब चला पता हादसे के बाद मौके पर पहुंचे लोगों ने पुलिस को सूचना दी। कार की हालत देखकर किसी के बचने की उम्मीद नहीं थी। पुलिसकर्मियों ने आवाज लगाई तो अंदर से कोई हलचल नहीं हुई। तभी कार के भीतर से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। पुलिसकर्मियों ने सावधानी से कार के हिस्से अलग कर छह साल के माहेर को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद कटर से कार की बॉडी काटकर अन्य लोगों के शव निकाले गए। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद रेस्क्यू पूरा हुआ। हादसे में विश्वेष, उनकी पत्नी निशा, मां किरण और चालक नीरज की मौत हो गई। बेटे की जिद पर खरीदी थी 2 हजार पटाखों की लड़ी पड़ोसियों उपेंद्र कुमार, रमन कुमार और विजय ठकराल ने बताया कि परिवार दिवाली की तैयारियों में जुटा था। दो दिन पहले ही विश्वेष ने बेटे माहेर की जिद पर दो हजार पटाखों की लड़ी खरीदी थी। पूरे मकान पर बिजली की झालरें लगवाई थीं। त्योहार पर रिश्तेदारों से मिलने की भी तैयारी थी। पड़ोसियों ने बताया कि घर की रेलिंग पर पत्नी के धोकर सुखाए कपड़े तक रखे हैं। घर पर झालरें लगी हैं, लेकिन उन्हें देखने वाले परिवार के लोग अब नहीं लौटेंगे। किसी को यकीन नहीं हो रहा कि दिवाली की खरीदारी करने निकला परिवार हमेशा के लिए बिछड़ गया। सोसाइटी ग्रुप पर आया मौत का संदेश, कॉलोनी में छाया सन्नाटा बुधवार शाम करीब सात बजे गोकुल एंक्लेव कॉलोनी के सोसाइटी ग्रुप पर संदेश आया कि विश्वेष कपूर, उनकी पत्नी और मां की देहरादून में सड़क हादसे में मौत हो गई है। संदेश मिलते ही कॉलोनी में सन्नाटा पसर गया। लोग घरों से बाहर निकल आए। कोई हादसे की जानकारी लेने लगा तो कोई परिवार के घर पहुंचा। कॉलोनी के लोग छह साल के माहेर के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। हादसे में घायल मासूम ने अपने माता-पिता और दादी को खो दिया है। चालक नीरज की तीन बेटियों के सिर से उठा पिता का साया हादसे में कार चालक नीरज की भी मौत हो गई। वह परिवार के साथ डेली वेज पर कार चलाता था। उसकी तीन बेटियां हैं। पिता की मौत से तीनों बेटियों के सिर से सहारे का हाथ उठ गया। दिवाली से पहले नीरज के परिवार की खुशियां भी मातम में बदल गईं। पांच साल पहले बनवाया था घर, अब रह गईं यादें विश्वेष कपूर पहले खेमका सदन, मिशन कंपाउंड में रहते थे। करीब पांच साल पहले उन्होंने गोकुल एंक्लेव कॉलोनी में मकान बनाकर परिवार के साथ रहना शुरू किया था। उनकी बड़ी बहन दिल्ली में रहती हैं। जिस घर को उन्होंने परिवार के लिए बनाया था, गुरुवार शाम उसी घर में तीन शव पहुंचे। दिवाली के लिए खरीदे गए उपहार, बेटे के पटाखे और घर पर लगी झालरें अब परिवार की अधूरी खुशियों की याद दिला रहे हैं। शाम को जब तीनों की चिताएं एक साथ जलीं तो पूरा मोहल्ला गमगीन हो गया।
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