सपा के वयोवृद्ध नेता राम गोविंद चौधरी का निधन:अखिलेश यादव समेत सपा के तमाम नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार देर रात लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीजीआई) में निधन हो गया। वे 80 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर दी। अखिलेश यादव ने लिखा, “समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्री राम गोविंद चौधरी जी का निधन, अत्यंत दुःखद! ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल प्राप्त हो। भावपूर्ण श्रद्धांजलि!” राम गोविंद चौधरी का जन्म 9 जुलाई 1946 को बलिया जिले में हुआ था। पिता द्वारिका चौधरी और माता तिलेश्वरी देवी के घर जन्मे चौधरी ने टीडी कॉलेज बलिया से पोस्ट ग्रेजुएशन और फिर एलएलबी की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही वे समाजवादी विचारधारा से जुड़े। आपातकाल के दौरान उन्होंने संपूर्ण क्रांति आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और जेल भी गए। उस समय बलिया के ज्यादातर कार्यकर्ता 19 महीने बाद रिहा हुए, लेकिन चौधरी की रिहाई 25 महीने बाद हुई। 1977 के लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से उनकी मुलाकात हुई। जेल से छूटने के बाद उनका काफिला देखकर चंद्रशेखर प्रभावित हुए और उन्हें अपना विश्वसनीय साथी बनाया। इसके बाद चौधरी की राजनीतिक यात्रा तेज हुई। वे कई बार विधायक रहे। बांसडीह विधानसभा सीट से उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव सरकार में वे बेसिक शिक्षा तथा बाल विकास एवं पोषण मंत्री रहे। 2017 से 2022 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दायित्व निभाया। 2022 के चुनाव में बांसडीह सीट से वे भाजपा की केतकी सिंह से हार गए थे। चौधरी को समाजवादी आंदोलन का मजबूत स्तंभ माना जाता था। वे मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव दोनों के करीबी रहे। शिक्षा और पिछड़े वर्गों के हितों के लिए वे हमेशा आवाज उठाते रहे। हाल के वर्षों में भी वे पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के रूप में सक्रिय थे और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहते थे। परिवार के अनुसार वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। लखनऊ के पीजीआई में उनका इलाज चल रहा था। शुक्रवार देर रात उनकी हालत अचानक बिगड़ी और डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके परिवार में पत्नी कलावती देवी और एक पुत्र हैं। निधन की खबर फैलते ही बलिया और लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और नेता उनके आवास और अस्पताल पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। सपा के महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने उनके निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने भी संवेदना व्यक्त की है।
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