यूपी में फॉरेंसिक-लैब की कमी पर हाईकोर्ट ने चिंता जताई:प्रदेश में 13 प्रयोगशालाएं, 4 सप्ताह के अंदर जवाब मांगा; नई लैब खोलने की मांग
हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में वैज्ञानिक सबूत जुटाने वाली फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की कमी का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच पहुंचा है। कोर्ट ने प्रदेश की आबादी और क्षेत्रफल के मुकाबले फॉरेंसिक लैब की कम संख्या पर चिंता जताते हुए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, उत्तर प्रदेश के निदेशक से चार सप्ताह में विस्तृत जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। जनहित याचिका पर दिया आदेश न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की खंडपीठ ने अधिवक्ता पीयूष गुप्ता की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। याचिका में फॉरेंसिक नमूनों की जांच और रिपोर्ट तय समय में पूरी करने के लिए ठोस व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। जांच और रिपोर्ट के लिए समय सीमा तय करने की मांग याचिका में राज्य सरकार को फॉरेंसिक जांच के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर जारी करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसमें नमूना प्रयोगशाला पहुंचने से लेकर जांच पूरी होने और रिपोर्ट भेजने तक की अधिकतम समय सीमा तय करने की मांग भी शामिल है। जेल में बंद आरोपियों के मामलों को प्राथमिकता देने की मांग याचिका में जेल में बंद आरोपियों से जुड़े मामलों की फॉरेंसिक जांच को प्राथमिकता देने की मांग की गई है। इसके मुताबिक, रिपोर्ट मिलने में देरी से विचाराधीन आरोपियों के मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है। गंभीर अपराधों में वैज्ञानिक सबूत समय पर उपलब्ध नहीं होने से अभियोजन पक्ष को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। प्रदेश में एक राज्य स्तरीय और 12 क्षेत्रीय लैब याचिका में कहा गया है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में देरी से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे पीड़ितों और उनके परिवारों को न्याय मिलने में भी देर हो सकती है। याचिका में प्रदेश में फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाने की मांग की गई है। फिलहाल राज्य में एक राज्य स्तरीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और 12 क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं संचालित हैं।
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