नगर आयुक्त पर भड़कीं महापौर:बोलीं- कानपुर में रहना है तो काम करना पड़ेगा, झगड़ा सिर्फ अधिकार का है
कानपुर नगर निगम की कार्यकारिणी की बैठक में वकीलों को बैठाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और बढ़ता जा रहा है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के बैठक छोड़कर चले जाने के बाद महापौर प्रमिला पांडेय ने 2 नवंबर को दोबारा कार्यकारिणी की बैठक बुलाने की बात कही है। महापौर ने साफ कहा कि अधिकारी बैठक में आएं या नहीं, शहर के मुद्दों पर चर्चा होगी और कार्यकारिणी के फैसलों से संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। वकीलों की मौजूदगी पर हुआ था विवाद महापौर की ओर से बुलाई गई बुधवार को कार्यकारिणी की बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी। बैठक में दो वकीलों की मौजूदगी पर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद वह अपने अधिकारियों के साथ बैठक छोड़कर चले गए थे। उन्होंने कहा था कि वह बाहरी लोगों को जवाब नहीं देंगे। नगर आयुक्त के इस कदम के बाद महापौर ने विरोध जताया था। वहीं, कार्यकारिणी सदस्यों और भाजपा पार्षदों ने नगर निगम मुख्यालय में नगर आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की थी। अब इस मामले में महापौर ने दोबारा बैठक बुलाकर शहर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने का ऐलान किया है। महापौर बोलीं- झगड़ा सिर्फ अधिकार का है महापौर प्रमिला पांडेय ने कहा कि नगर आयुक्त से उनकी कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। विवाद अधिकारों को लेकर है। उन्होंने कहा कि मेरा किसी से विरोध नहीं है। मेयर के क्या अधिकार हैं, इस बात को लेकर मामला है। लाइट, सफाई और शहर के दूसरे मुद्दों पर चर्चा के लिए सोमवार को फिर कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। महापौर ने बताया कि बैठक में 12 कार्यकारिणी सदस्यों के साथ शहर के मुद्दों पर चर्चा होगी। संबंधित अधिकारी बैठक में नहीं आते हैं तो निर्णय उन्हें भेज दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को तय काम करने होंगे और जायज कामों को टाला नहीं जा सकता। फाइलें, कूड़े का टेंडर और कन्वेंशन सेंटर पर सवाल महापौर ने 10 लाख रुपये से कम की फाइलें उपलब्ध नहीं कराए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन फाइलों को मांगे काफी समय हो गया, लेकिन अब तक उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके अलावा कूड़े के टेंडर को लेकर भी महापौर ने आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि इस मामले में उनसे राय नहीं ली गई। कन्वेंशन सेंटर को हैंडओवर किए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कार्यकारिणी में इस मुद्दे पर महापौर और नगर आयुक्त के मिलकर फैसला लेने की बात तय हुई थी। महापौर ने कहा कि विवाद किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि अधिकारों से जुड़ा है। अब 2 नवंबर की बैठक में लाइट, सफाई समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा और लिए जाने वाले फैसलों पर सबकी नजर रहेगी।
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