110 साल की उम्र में केएल गुप्ता का निधन:गोरखपुर में 60 साल तक रेलवे कर्मचारियों के हक की लड़े लड़ाई, आजादी के आंदोलन के भी रहे गवाह
गोरखपुर में 110 साल की उम्र में रेलवे कर्मचारी आंदोलन के वरिष्ठ नेता केएल गुप्ता का निधन हो गया। उन्होंने अपनी जिंदगी के करीब 60 साल रेलवे कर्मचारियों और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने में लगा दिए। उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी उनका जज्बा और कर्मचारियों के प्रति समर्पण कम नहीं हुआ। वह तीन पीढ़ियों के रेलवे कर्मचारियों को नेतृत्व और मार्गदर्शन देते रहे। नौकरी से रिटायर होने के बाद भी उन्होंने खुद को मजदूर आंदोलन से अलग नहीं किया। रेलवे कर्मचारियों के बीच उनकी ऐसी पहचान बनी कि मजदूर यूनियन का कार्यालय ही उनका दूसरा घर बन गया था। शुक्रवार को पुर्दिलपुर स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से रेलवे कर्मचारियों और मजदूर संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई। रिटायरमेंट के बाद भी जारी रखा कर्मचारियों के लिए संघर्ष केएल गुप्ता ने रेलवे की नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद भी कर्मचारियों के हितों के लिए संघर्ष जारी रखा। उन्होंने अपना पूरा जीवन मजदूरों की समस्याओं को उठाने और उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ने में समर्पित कर दिया। यही वजह रही कि नौकरी से रिटायर होने के कई दशक बाद तक भी वह कर्मचारी संगठनों में सक्रिय रहे। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में रेलवे कर्मचारियों की तीन पीढ़ियां तैयार हुईं। वह कर्मचारियों के बीच हमेशा एक अभिभावक और मार्गदर्शक की भूमिका में रहे। ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन में निभाई अहम जिम्मेदारी केएल गुप्ता ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के सहायक महामंत्री के पद पर भी रहे। इस दौरान उन्होंने रेलवे कर्मचारियों की समस्याओं को संगठन के माध्यम से प्रमुखता से उठाया। उनकी लोकप्रियता और संगठन के प्रति समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह लगातार इस पद के लिए चुने जाते रहे। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के चलते पिछले साल उन्होंने सहायक महामंत्री का पद छोड़ दिया था। इसके बावजूद कर्मचारियों और मजदूर संगठनों से उनका जुड़ाव बना रहा। आजादी के आंदोलन के दौर की यादें भी थीं ताजा
110 साल की जिंदगी में केएल गुप्ता ने देश के कई ऐतिहासिक दौर देखे। उनकी युवावस्था उस समय की थी, जब देश अंग्रेजों की गुलामी से आजाद होने के लिए संघर्ष कर रहा था। उन्होंने एक बातचीत में बताया था कि महात्मा गांधी के गोरखपुर आने की सूचना मिलने पर वह उन्हें देखने के लिए दौड़ पड़े थे। गांधीजी के ‘करो या मरो’ के नारे और आजादी के आंदोलन से जुड़ी यादें भी उन्होंने साझा की थीं।
सिब्बन लाल सक्सेना और गेंदा सिंह से जुड़कर बने मजदूर नेता
केएल गुप्ता ने बताया था कि आजादी के दौर में सिब्बन लाल सक्सेना और गेंदा सिंह जैसे नेताओं के संपर्क में आने के बाद उनका जुड़ाव ट्रेड यूनियन आंदोलन से हुआ। इसके बाद उन्होंने रेलवे कर्मचारियों और मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष को ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। आजादी के बाद से लगातार पूर्वोत्तर रेलवे के कर्मचारियों की आवाज उठाते रहे। उनका मानना था कि कर्मचारियों के अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठाना जरूरी है।
आखिरी समय तक कर्मचारियों के बीच बनी रही पहचान
केएल गुप्ता का जीवन संघर्ष, सादगी और कर्मचारी हितों के प्रति समर्पण की मिसाल रहा। नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वह मजदूरों के बीच सक्रिय रहे। उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण पिछले साल उन्होंने संगठन का पद छोड़ दिया था। शुक्रवार को पुर्दिलपुर स्थित आवास पर उनके निधन के बाद रेलवे कर्मचारियों, पूर्व कर्मचारी नेताओं और मजदूर संगठनों से जुड़े लोगों में शोक है। उनके जाने से रेलवे कर्मचारी आंदोलन ने एक अनुभवी और समर्पित नेतृत्वकर्ता खो दिया है।
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