4लोगों की हत्या के तीन-दोषियों की फांसी उम्रकैद में बदली:पत्नी की अपील खारिज, कब्रिस्तान की जमीन के विवाद में हुई थी चार लोगों की हत्या
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में कब्रिस्तान की जमीन के विवाद में चार लोगों की हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तीन दोषियों अमजद, रमजान और अरशद की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्य और परिस्थितियां इसे विरल से विरलतम श्रेणी में रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में मृत्युदंड के बजाय आजीवन कारावास की सजा देना न्याय के हित में होगा। वहीं, दोषी अमजद की पत्नी शकीला की उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी गई है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने अमजद, रमजान और अरशद की ओर से मृत्युदंड के खिलाफ दाखिल अपीलों और सजा की पुष्टि के लिए भेजे गए संदर्भ पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। हालांकि, अन्य अपराधों में निचली अदालत की ओर से सुनाई गई सजाएं बरकरार रहेंगी। 2012 में मजार परिसर में हुआ था खूनी संघर्ष मामला 16 जून 2012 को वाराणसी के बेनियाबाग स्थित बाबा रहीम शाह मजार परिसर का है। यहां कब्रिस्तान की जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। आरोप था कि अमजद और उसके परिवार के लोगों ने बांस के डंडों से दूसरे पक्ष के लोगों के सिर पर हमला कर दिया था। इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। मामले में सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने 14 अक्टूबर 2022 को अमजद, रमजान और अरशद को फांसी तथा शकीला को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही और मेडिकल साक्ष्य को माना विश्वसनीय हाईकोर्ट ने फैसले में अभियोजन पक्ष के प्रत्यक्षदर्शियों और घायल गवाह की गवाही को विश्वसनीय माना। मेडिकल साक्ष्यों से भी इनकी पुष्टि हुई। कोर्ट ने चार लोगों की हत्या और एक व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल करने के आरोपों को साबित माना। हालांकि, अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता के बावजूद मामला विरल से विरलतम श्रेणी में नहीं आता। इसी आधार पर तीनों दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया। वहीं, शकीला की अपील खारिज कर उसकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई।
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