स्पेशल बोट से होगी रामगढ़ताल की सफाई:ताल में फैला कचरा व जलकुंभी हटायी जा सकेगी; IIT रोपड़ से लेंगे सहयोग
रामगढ़ताल को साफ करने के लिए अब तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। जलकुंभी व कचरा निकालने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) की ओर से स्पेशल बोट खरीदी जाएगी। दो बोट एक साथ चलेगी और उसके बीच लगा तैरता हुआ अवरोधक 10 मीटर चौड़ाई में कचरा व जलकुंभी किनारे कर देगा। इसपर करीब 60 लाख रुपये की लागत आएगी। बोट की क्षमता 10 हार्स पावर होगी। इसी तरह ताल की सफाई के लिए रोबोट का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसकी खरीद पर भी 50 से 60 लाख रुपये खर्च होंगे। ये रोबोट भी पानी में तैरते हुए कचरे, मलबे, प्लाटिक को हटाने में मददगार होंगे। रामगढ़ताल को केवल कचरा मुक्त ही नहीं, बल्कि जलीय जीवों के अनुकूल बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। प्राधिकरण ताल की सफाई से लेकर पानी की गुणवत्ता सुधारने तक के लिए कई स्तरों पर काम कर रहा है। इसके तहत विशेष सफाई नौकाएं खरीदी जाएंगी, कचरा और जलकुंभी हटाने के लिए रोबोट लगाए जाएंगे और पानी की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए वास्तविक समय में काम करने वाले संवेदक लगाए जाएंगे। साथ ही पानी में आक्सीजन की मात्रा बढ़ाने के लिए चार नैनो बबल जनरेटर स्थापित किए जाएंगे। जीडीए के मुख्य अभियंता किशन सिंह ने बताया कि पैडलेगंज के पास ताल में 60 मीटर लंबा कचरा अवरोधक लगाया जाएगा। इसके साथ ही कूड़ा, प्लास्टिक और जलकुंभी हटाने के लिए स्पेशल बोट खरीदी जाएगी। इसके लिए निविदा आमंत्रित की गई है। मोहद्दीपुर में पहले से लगा क्षतिग्रस्त कचरा अवरोधक भी ठीक कराया जाएगा। ताल की सफाई में तकनीक का एक और इस्तेमाल रोबोट के रूप में होगा। जीडीए जेम पोर्टल के माध्यम से 50 से 60 लाख रुपये की लागत से रोबोट खरीदेगा। ये पानी में तैरते कूड़े, प्लास्टिक और मलबे के साथ काई आदि हटाने का काम करेंगे। इन रोबोट पर विशेष संवेदक भी लगाए जाएंगे, जिनकी मदद से ताल के अलग-अलग स्थानों पर पानी की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा सकेगी। इससे पानी की स्थिति में होने वाले बदलाव का समय रहते पता चलेगा। इसके अलावा पैडलेगंज और मोहद्दीपुर चौराहे के पास जहां नालों का पानी ताल में गिरता है, वहां जमी गाद हटाने के लिए खुदाई कराई जाएगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण से 21 अगस्त को अनुमति मिल चुकी है। इससे नालों के मुहाने पर जमा गाद और अपशिष्ट को हटाने में मदद मिलेगी। इसके लिए प्राधिकरण, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रोपड़ के साथ भी जल्द समझौता करेगा। इसके तहत ताल में चार वायु नैनो बुलबुला जनरेटर लगाए जाएंगे। प्रत्येक जनरेटर प्रति घंटे 300 से 500 घन मीटर पानी में आक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में सक्षम होगा। इससे पानी की जैविक और रासायनिक आक्सीजन मांग (बीओडी और सीओडी) में सुधार होगा और जलीय जीवों को अनुकूल वातावरण मिलेगा। इन उपकरणों का संचालन और रखरखाव भी आइआइटी रोपड़ करेगा। इस परियोजना पर 2.44 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने बताया कि रामगढ़ताल को सुंदर बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। सफाई के लिए अब आधुनिक मशीनों और रोबोट का प्रयोग किया जाएगा। इससे सफाई में काफी मदद मिलेगी।
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