आगरा से मिलेगी दलित राजनीति को हवा:सपा के दलित सम्मेलन के बाद बसपा की होगी जनसभा

Nov 07, 2026 - 15:57
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आगरा से मिलेगी दलित राजनीति को हवा:सपा के दलित सम्मेलन के बाद बसपा की होगी जनसभा
विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच दलित राजनीति फिर से गर्माने लगी है। दलित वोट बैंक को साधने की राजनीतिक बिसात अभी से बिछने लगी है। इस सियासी रणनीति का केंद्र आगरा बनने जा रहा है। यहां 7 दिन के अंतराल में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दो बड़े कार्यक्रम करने जा रही हैं। दोनों पार्टियों के राष्ट्रीय स्तर के नेता आगरा पहुंचेंगे और दलित समाज के बीच अपनी राजनीतिक ताकत दिखाएंगे। सपा-बसपा के ये हैं कार्यक्रम 15 नवंबर को सपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश का दलित महासम्मेलन करेगी। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शामिल होंगे। वहीं 22 नवंबर को बसपा की जनसभा प्रस्तावित है। इसमें राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद आएंगे। बसपा इस जनसभा में एत्मादपुर विधानसभा सीट से अपने प्रत्याशी की घोषणा करने की तैयारी में भी है। इन कार्यक्रमों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि आगरा और आसपास के जिलों में दलित मतदाताओं की अच्छी राजनीतिक भागीदारी है। सपा पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के जरिए दलित समाज को अपने साथ जोड़ना चाहती है, जबकि बसपा अपने परंपरागत वोट बैंक को फिर से मजबूत करने में जुटी है। दोनों दलों की तैयारी बताती है कि 2027 के चुनाव में दलित मतदाता अहम भूमिका निभा सकते हैं। दोनों की रणनीति अलग 22 नवंबर : बसपा की जनसभा सपा की नजर दलितों पर सपा के लिए दलित महासम्मेलन केवल भीड़ जुटाने का कार्यक्रम नहीं है। पार्टी पीडीए के सामाजिक समीकरण को मजबूत करना चाहती है। अखिलेश यादव की मौजूदगी के जरिए दलित समाज को यह संदेश देने की कोशिश होगी कि पार्टी उनके मुद्दों को राजनीतिक प्राथमिकता दे रही है। पश्चिमी यूपी के तीन मंडलों से लोगों को जुटाने की तैयारी इस कार्यक्रम के बड़े राजनीतिक दायरे को दिखाती है। बसपा की चुनौती: परंपरागत वोट बैंक को फिर से एकजुट करना बसपा के लिए आगरा की जनसभा संगठन और कैडर को सक्रिय करने का मौका होगी। आकाश आनंद की मौजूदगी से युवा कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने और पार्टी के परंपरागत सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश होगी। एत्मादपुर सीट पर प्रत्याशी की घोषणा भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। चुनाव से काफी पहले उम्मीदवार घोषित करने से उसे क्षेत्र में जनसंपर्क और संगठन मजबूत करने का समय मिल सकता है। आगरा से पश्चिमी यूपी तक क्यों जाएगा राजनीतिक संदेश? अब नजर रहेगी इन तीन सवालों पर

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