दीपावली पर कानपुर में सफाई व्यवस्था फेल:सड़कों पर कूड़े का ढेर, 300 टन एक्स्ट्रा कचरे ने बढ़ाई मुसीबत

Nov 07, 2026 - 09:20
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दीपावली पर कानपुर में सफाई व्यवस्था फेल:सड़कों पर कूड़े का ढेर, 300 टन एक्स्ट्रा कचरे ने बढ़ाई मुसीबत
दीपावली का त्योहार खुशियों और रोशनी का पर्व है, लेकिन कानपुर की सड़कों पर जगह-जगह फैले कूड़े के ढेर त्योहार की चमक को फीका कर रहे हैं। शहर में सफाई व्यवस्था की हकीकत जानने के लिए दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में कई इलाकों में गंदगी का अंबार मिला। प्रेम नगर चौराहा, सीसामऊ बड़ा चौराहा, गांधी नगर और अशोक नगर समेत कई इलाकों में सड़क किनारे कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। कहीं खाने-पीने की बची सामग्री पड़ी है तो कहीं प्लास्टिक, कागज और घरेलू कचरा सड़ रहा है। त्योहार के दौरान घरों और बाजारों से निकलने वाले अतिरिक्त कूड़े ने हालात और खराब कर दिए हैं। देखिए 3 तस्वीरे… सड़क पर कूड़े के ढेर, बदबू से परेशान लोग सड़क किनारे जमा कूड़ा अब लोगों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। कचरा सड़ने से आसपास के इलाकों में तेज बदबू फैल रही है। स्थानीय लोगों और राहगीरों को नाक पर कपड़ा रखकर वहां से गुजरना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को है, जिनके घर और दुकानें कूड़े के ढेर के आसपास हैं। लोगों का कहना है कि त्योहार के समय सफाई व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए, लेकिन कई जगहों पर नियमित सफाई तक नहीं हो रही है। कूड़े के ढेर के आसपास आवारा जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है। यह जानवर खाने की तलाश में कचरे को सड़क पर फैला देते हैं। इससे वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए भी खतरा बना रहता है। अचानक सड़क पर आ जाने वाले जानवरों से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कूड़े के ढेर से निकलना हुआ मुश्किल कई जगहों पर कूड़ा सड़क किनारे लंबे समय तक पड़ा रहता है। काकादेव निवासी राजकुमार ने बताया कि सफाई कर्मचारी नियमित रूप से कूड़ा नहीं उठा रहे हैं। कई बार कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां भी समय पर नहीं पहुंचतीं। ऐसे में घरों और दुकानों से निकलने वाला कचरा सड़कों पर ही जमा होता रहता है। त्योहार पर बाजारों में खरीदारी और खानपान बढ़ने से कचरे की मात्रा भी बढ़ गई है। खाने-पीने की सामग्री के साथ प्लास्टिक और कागज के कचरे का ढेर लग रहा है। उन्होंने बताया कि नगर निगम को त्योहार के दौरान विशेष सफाई अभियान चलाना चाहिए था, ताकि लोगों को गंदगी और दुर्गंध से राहत मिल सके। रोज 1500 मीट्रिक टन कूड़ा, 1350 मीट्रिक टन ही उठान शहर में रोजाना करीब 1500 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है, जबकि नगर निगम की व्यवस्था से लगभग 1350 मीट्रिक टन कूड़ा ही उठ पाता है। यानी रोजाना करीब 150 मीट्रिक टन कूड़ा उठान से छूट जाता है। दीपावली के त्योहार के चलते कूड़े की मात्रा में करीब 300 मीट्रिक टन अतिरिक्त इजाफा हो जाता है। इससे सफाई व्यवस्था पर दबाव और बढ़ गया है। कूड़ा उठाने के लिए नगर निगम की 68 गाड़ियां लगाई गई हैं, हालांकि इनमें से कुछ गाड़ियां खराब भी रहती हैं। शहर में करीब पांच हजार सफाई कर्मचारी तैनात हैं। इसके बावजूद कई इलाकों में कूड़े का समय से उठान नहीं हो पा रहा है। मौजूदा समय में जेटीएन और दीक्षांत कंपनी कुछ क्षेत्रों में घर-घर से कूड़ा उठा रही हैं। भाऊसिंह पनकी प्लांट में कूड़े से खाद और ग्रीन कोल शहर से उठाए जाने वाले कूड़े का निस्तारण भाऊसिंह पनकी स्थित नगर निगम के प्लांट में किया जाता है। यहां कचरे को अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजारकर खाद और ग्रीन कोल तैयार किया जाता है। वहीं कूड़े के मलबे का इस्तेमाल इंटरलॉकिंग टाइल्स बनाने में भी किया जाता है, जबकि सूखे कूड़े से भी खाद तैयार करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। 15 नवंबर से सफाई व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि सभी छह जोन की सफाई व्यवस्था निजी कंपनियों को सौंपने के बाद 15 नवंबर से शहर की तस्वीर बदल सकती है। अब झाड़ू लगाने, नालियों की सफाई, घर-घर से कूड़ा उठाने और उसके निस्तारण की जिम्मेदारी निजी कंपनियां संभालेंगी। इसके लिए नगर निगम ने जोन-1 और 2 में हैदराबाद की एसआर कंस्ट्रक्शन, जोन-3 और 5 में लखनऊ की लॉयन सिक्योरिटी और जोन-4 व 6 में गाजियाबाद की जेएस इन्वायरो का चयन किया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने से सफाई की निगरानी बेहतर होगी और कूड़ा उठान में भी तेजी आएगी। 225 करोड़ से लगेगा नया प्लांट, कूड़े से बनेगी सीएनजी भाऊसिंह पनकी स्थित कूड़ा निस्तारण स्थल पर नगर निगम 15 हेक्टेयर जमीन में करीब 225 करोड़ रुपये की लागत से नया प्लांट लगाने की तैयारी कर रहा है। इस प्लांट में सीयूजीएल रोजाना निकलने वाले करीब 1350 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण करेगी। इसमें लगभग 600 मीट्रिक टन कूड़े से सीएनजी गैस बनाई जाएगी, जबकि बाकी कचरे का निर्धारित मानकों के अनुसार निस्तारण होगा। नगर निगम का दावा है कि इस परियोजना से कूड़े के निस्तारण पर हर साल खर्च होने वाले करीब 25 करोड़ रुपये की बचत हो सकेगी। दीपावली पर शहर की सफाई व्यवस्था बेपटरी शहर में सफाई के लिए हजारों कर्मचारी, दर्जनों गाड़ियां और कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था होने के बावजूद सड़कों पर कचरे का अंबार लगा होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। नई कंपनियों के आने और करोड़ों रुपये के प्लांट की योजना से भविष्य में हालात सुधरने की उम्मीद जरूर है, लेकिन फिलहाल लोगों को राहत की जरूरत है। स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहार पर सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सिर्फ नई योजनाओं और दावों से शहर साफ नहीं होगा, बल्कि हर सड़क, चौराहे और मोहल्ले से समय पर कूड़ा उठाना भी जरूरी है।

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