हाईकोर्ट ने बलरामपुर डीएम पर 20 हजार का जुर्माना लगाया:अतिक्रमण याचिका में निर्देश नहीं मिले थे, निजी खाते से जमा करनी होगी रकम
बलरामपुर में सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। आवश्यक निर्देश उपलब्ध नहीं कराने पर न्यायालय ने डीएम डॉ. विपिन कुमार जैन पर 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
यह धनराशि उन्हें सरकारी खाते से नहीं, बल्कि अपने निजी खाते से जमा करनी होगी। साथ ही, व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर देरी का कारण भी बताना होगा। तीन नवंबर को हुई मामले की सुनवाई जज जसप्रीत सिंह की एकल पीठ ने तीन नवंबर को जनहित याचिका शिव जी पांडेय एवं एक अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। कोर्ट ने पाया कि याचिका की अग्रिम प्रति 11 अगस्त को मिलने और 14 अगस्त तथा 27 अक्तूबर को पत्राचार होने के बावजूद सरकारी पक्ष को जरूरी निर्देश नहीं मिले। इससे सुनवाई प्रभावित हुई। कोर्ट ने निर्देश दिया कि डीएम लागत की रसीद न्यायालय में प्रस्तुत करें। आदेश का अनुपालन नहीं होने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी। डीएम बोले- समय से किया गया था पत्राचार उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में बलरामपुर सदर तहसील क्षेत्र से संबंधित जनहित याचिका में पारित आदेश के संबंध में डीएम डॉ. विपिन कुमार जैन ने जिला प्रशासन का पक्ष स्पष्ट किया है। डीएम ने बताया कि उक्त प्रकरण जिले की सदर तहसील से संबंधित है। इस संबंध में आवश्यक विधिक निर्देश और आख्या प्राप्त करने के लिए संबंधित स्तर पर समय से पत्राचार किया गया था, लेकिन कुछ प्रक्रियात्मक कारणों के चलते निर्धारित तिथि तक न्यायालय के समक्ष आवश्यक निर्देश प्रस्तुत नहीं किए जा सके। अभिलेखों की समीक्षा की जा रही उन्होंने बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पत्राचार और अभिलेखों की गहन समीक्षा की जा रही है। साथ ही, संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम ने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन उच्च न्यायालय के आदेशों का पूर्ण सम्मान करता है। न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में निर्धारित समयावधि के भीतर सभी आवश्यक विधिक प्रक्रियाएं पूरी करते हुए आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
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