NCZCC में नाटक ‘पक्ष-विपक्ष’ का मंचन... VIDEO:प्राचीन नाट्य शैली में दिखा सत्ता और विपक्ष के वैचारिक द्वंद्व
प्रयागराज में माध्यम संस्थान ‘रंगमंडल’ की ओर से गुरूवार को एनसीजेडसीसी में नाटक ‘पक्ष-विपक्ष’ का मंचन किया गया। जिसमें महाकवि कालिदास के प्रसिद्ध संस्कृत नाटक ‘मालविकाग्निमित्रम्’ की स्वतंत्र विचार है। नाटक के जरिए प्राचीन संस्कृत नाट्य शैली को समकालीन राजनीतिक यथार्थ से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। जो कि सत्ता तथा प्रतिपक्ष के बीच छिपे वैचारिक द्वंद्व को दिखाता है। नाटक के केंद्रीय संदेश में लोकतंत्र में सत्ता-पक्ष और विपक्ष दोनों जनता के हित की बात करते हैं। लेकिन व्यवहार में राजनीतिक स्वार्थ और सत्ता की तड़क को लेकर उनके आपसी संबंध बनते-बिगड़ते हैं। राजा अग्निमित्र की विलासिता और राजनीतिक उपेक्षा के बीच विदूषक पंडित मान्ढव्य अपनी बुद्धिमत्ता से राष्ट्र-विरोधी षड्यंत्रों का पर्दाफाश करते हैं और दोबारा अग्निमित्र को सिंहासन पर आसीन कराते हैं। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से प्रस्तुत इस नाटक का निर्देशन वरिष्ठ निर्देशक डॉ. विनय श्रीवास्तव ने किया, जबकि आलेख डॉ. अनुपम आनंद का रहा। कलाकारों ने बांधा समां शास्त्रीय रंगमंचीय शैली में प्रस्तुत नाटक की भव्य मंच सज्जा, लयपूर्ण संवाद, प्रभावशाली संगीत और कलाकारों के भावप्रवण अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अतुल कुशवाहा ने अग्निमित्र और आशुतोष मंजुलशरण ने पंडित मान्ढव्य की भूमिका निभाई। अन्य प्रमुख कलाकारों में विनय मिश्र, दिनेश पांडेय, श्यामनाथ शर्मा (चित्रकार), दिव्या शुक्ला (परिव्राजिका), गौरेश आहुजा (गणदास), नवीन चतुर्वेदी (हरदत्त), ब्रजेश त्रिपाठी (कुटिलक), प्रिया श्रीवास्तव व कंचन श्रीवास्तव (रानी), गरिमा श्रीवास्तव (बकुलावलिका), ज्योति श्रीवास्तव (मधुरिका) तथा राहुल चावला (सूत्रधार) शामिल रहे। अंशू श्रीवास्तव, सुजीत चंद्रा, ओम श्रीवास्तव, लवकुश भारतीय, अनूप श्रीवास्तव, स्वाति चावला और प्रसिद्धि श्रीवास्तव ने भी सराहनीय अभिनय किया। निर्माण टीम का योगदान नाटक की प्रकाश परिकल्पना सुजॉय घोषाल, संगीत संयोजन रिभु श्रीवास्तव, रूप सज्जा संजय चौधरी और वस्त्र विन्यास अंशु श्रीवास्तव ने किया। दिव्या शुक्ला तथा अनूप श्रीवास्तव ने सह-निर्देशन किया, जबकि प्रस्तुति डॉ. अशोक कुमार शुक्ल की रही।
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