लोकतंत्र बचाओ यात्रा पर कांग्रेस का हमला:मोना बोलीं- भाजपा की यात्रा लोकतंत्र के खिलाफ, SIR से यूपी में 3.31 करोड़ वोट कम हुए
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ यात्रा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा की यह यात्रा असल में लोकतंत्र बचाने के लिए नहीं, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में और देश के प्रजातंत्र के खिलाफ निकाली जा रही है। SIR के नाम पर करोड़ों मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मोना ने कहा कि भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष नितिन नवीन गोरखपुर, पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा बरेली और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान लखनऊ में इस यात्रा में शामिल हुए। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह हैदराबाद और करनाल में इस अभियान का हिस्सा बने। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व अध्यक्ष, गृह मंत्री और कृषि मंत्री जिस यात्रा में शामिल हो रहे हैं, वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के खिलाफ निकाली जा रही है। मोना ने आरोप लगाया कि अमित शाह की उत्तर प्रदेश यात्रा और SIR के जरिए मतदाताओं के नाम काटने के पीछे आदित्यनाथ की सरकार में बदलाव की मंशा है। उन्होंने कहा कि SIR के पीछे नरेंद्र मोदी और अमित शाह हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में पार्टी वोट चोरी के खिलाफ लोकतंत्र बचाने की लड़ाई लड़ रही है। आंबेडकर की चेतावनी याद दिलाई मोना ने संविधान सभा में 16 जून 1949 को डॉ. भीमराव आंबेडकर के दिए बयान का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त का कार्यकाल निश्चित और सुरक्षित करने का कोई फायदा नहीं है, यदि संविधान में ऐसे व्यक्ति को रोकने का प्रावधान न हो जो मूर्ख, धूर्त या सरकार के दबाव में काम करने वाला हो। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी के बयान का भी जिक्र किया। मोना के मुताबिक, अधिकारी ने कहा है कि SIR में जिन लोगों के नाम कटेंगे, उन्हें सरकारी राशन, सरकारी लाभ और सामाजिक योजनाओं का फायदा नहीं मिलेगा। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी पहले SIR में नाम कटने वालों को सरकारी सेवाओं से अलग करने की बात कह चुके हैं। मुख्यमंत्री के आंकड़ों से 3.31 करोड़ वोट कम होने का दावा मोना ने SIR के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री की ओर से बताए गए प्रदेश की अनुमानित आबादी और स्थानीय निकायों की मतदाता सूची का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मुताबिक उत्तर प्रदेश की अनुमानित आबादी 25.70 करोड़ है। इसका करीब 65% हिस्सा मतदाता होना चाहिए। इस हिसाब से प्रदेश में लगभग 16.70 करोड़ मतदाता होने चाहिए। उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग की स्थानीय निकायों की मतदाता सूचियों के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि ग्राम पंचायतों में 12.43 करोड़, नगर निगमों में 1.90 करोड़, नगर पालिका परिषदों में 1.48 करोड़ और नगर पंचायतों में 93.72 लाख मतदाता दर्ज हैं। इन सभी को मिलाकर कुल मतदाताओं की संख्या 16.77 करोड़ होती है। इसके मुकाबले SIR के बाद उत्तर प्रदेश में 13.39 करोड़ मतदाता ही रह गए हैं। कांग्रेस के मुताबिक, दोनों आंकड़ों के बीच करीब 3.31 करोड़ का अंतर है। कार्यसमिति में मुख्यमंत्री के सामने रखे गए आंकड़े भी गिनाए मोना ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा की कार्यसमिति में मुख्यमंत्री ने भी मतदाता सूची को लेकर चिंता जताई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा था कि प्रदेश में 16 करोड़ से ज्यादा मतदाता होने चाहिए, जबकि सूची में करीब 13 करोड़ नाम हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने 1.27 करोड़ मतदाताओं के नाम गायब होने, पंचायत मतदाता सूची में दर्ज 66 लाख लोगों के विधानसभा सूची में शामिल नहीं होने और सरकारी योजनाओं के करीब 55 लाख लाभार्थियों के नाम मतदाता सूची में नहीं होने का मुद्दा उठाया था। इसके अलावा 18-19 साल के करीब साढ़े चार लाख युवाओं के नाम नहीं जुड़ने और दूसरे राज्यों से बहू बनकर आई महिलाओं के नाम सूची में नहीं होने की बात भी कही गई थी। मोना के अनुसार, मुख्यमंत्री ने 45 विधानसभा सीटों पर कम अंतर से हार-जीत और शहरी निकायों की 28 सीटों को लेकर भी चिंता जताई थी। अंत में मोना ने कहा कि अमित शाह की उत्तर प्रदेश यात्रा का असर आगामी राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा। कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में SIR के जरिए वोट चोरी नहीं होने देगी और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना की लड़ाई जारी रखेगी।
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