MLC चुनाव में ज्योतिषाचार्य इंदु प्रकाश की पत्नी हारीं:दूसरों का भविष्य बताते हैं; पत्नी की चुनावी किस्मत नहीं भांप सके

Oct 28, 2026 - 16:22
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MLC चुनाव में ज्योतिषाचार्य इंदु प्रकाश की पत्नी हारीं:दूसरों का भविष्य बताते हैं; पत्नी की चुनावी किस्मत नहीं भांप सके
लखनऊ खंड स्नातक एमएलसी चुनाव में ज्योतिषाचार्य आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा की पत्नी स्मिता मिश्रा को हार का सामना करना पड़ा। भविष्यवाणी करने वाले आचार्य इंदु प्रकाश अपनी पत्नी की चुनावी किस्मत नहीं बदल सके। स्मिता मिश्रा ने चुनाव में जीत के लिए खूब प्रचार किया, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। स्मिता मिश्रा 28 सितंबर को कांग्रेस में शामिल हुई थीं। उस समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली थी। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें लखनऊ खंड स्नातक सीट से प्रत्याशी घोषित करने का आश्वासन मिला था। हालांकि, कुछ ही दिन बाद अजय राय प्रदेश अध्यक्ष पद से हट गए। नई अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने एमएलसी चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया। बावजूद स्मिता मिश्रा निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में डटी रहीं। उन्हें 300 वोट भी नहीं मिले। पत्नी की हार पर ट्रोल हो रहे इंदु प्रकाश मिश्रा स्मिता मिश्रा ने चुनाव प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने स्नातकों, युवाओं और शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोगों के बीच जनसंपर्क किया। प्रचार के लिए अखबारों में पूरे पेज के विज्ञापन भी दिए। इसके बावजूद वह चुनाव नहीं जीत सकीं। जबकि चुनावी अभियान के दौरान उन्हें नवयुवक दल, करणी सेना और स्थानीय ब्रह्म समाज जैसे विभिन्न सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिला था। उनकी हार के साथ ही ज्योतिषाचार्य आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा को लेकर लोग जमकर ट्रोेल कर रहे हैं। लोग चुटकी ले रहे हैं कि दूसरों का भविष्य बताने वाले ज्योतिषाचार्य अपनी पत्नी की चुनावी किस्मत का अनुमान लगाने में कहां चूक गए। वह लोगों को परेशानियों से बचने के लिए कई उपाय और टोटके भी बताते हैं, तो पत्नी को क्यों नहीं बताए। हालांकि खुद स्मिता मिश्रा ने बताया कि ज्योतिषाचार्य से मैंने अपने चुनावी भविष्य को लेकर कुछ नहीं पूछा था। उनके यहां अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों से जुड़े लोग आते हैं और उनके बताए टोटके या उपाय कर वो सफलता हासिल करते रहे हैं, लेकिन मैं एमएलसी चुनाव में सत्ता सुख के लिए नहीं उतरी थी। मेरा भाव जनसेवा और परोपकार का था। इंदु प्रकाश मिश्रा की वेबसाइट पर उनकी प्रमुख भविष्यवाणी वेबसाइट आचार्य इंदु प्रकाश डॉट काम पर प्रमुख 7 भविष्यवाणी का उल्लेख है। खुद की हार पर स्मिता मिश्रा ने क्या कहा लखनऊ खंड स्नातक एमएलसी चुनाव में हार के बाद निर्दलीय प्रत्याशी स्मिता मिश्रा ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए । दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में बूथ कैप्चरिंग हुई। उनके एजेंट को मतदान केंद्र के अंदर नहीं बैठने दिया गया। अधिकारियों ने उनके सामने ही एजेंट को डांटकर बाहर निकाल दिया। स्मिता मिश्रा ने कहा कि उन्होंने दो साल तक चुनाव की तैयारी की। 37 तहसीलों के स्कूल-कॉलेजों में जाकर शिक्षकों, विद्यार्थियों और स्नातकों से संपर्क किया। इसके बावजूद प्रशासन ने उनके समर्थकों के वोट नहीं बनने दिए और कई लोगों को मतदान करने से रोका गया। उन्होंने मतदाता सूची में गड़बड़ी और फर्जी मतदान के आरोप भी लगाए। स्मिता मिश्रा ने कहा, 'हमारे एजेंट को हमारे सामने ही डांटकर बाहर निकाल दिया गया। एसडीएम ने कहा कि किस रूल बुक में लिखा है कि बूथ के अंदर एजेंट बैठेगा। हमारे एजेंट को बैठने नहीं दिया गया। पूरा चुनाव प्रभावित किया गया।' स्मिता मिश्रा ने चुनाव में पैसे के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ मतदाताओं से वोट पाने के लिए पैसे दिए जाने की शिकायतें मिलीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पढ़े-लिखे लोग मतदान कर रहे हैं, तो क्या ही कहूं। '22 हजार ऑनलाइन फॉर्म जमा किए, लेकिन वोटर लिस्ट में नाम नहीं जुड़े' स्मिता मिश्रा ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके समर्थकों ने ऑनलाइन करीब 22 हजार फॉर्म भरे थे। उनके मुताबिक, इन फॉर्मों को जमा करने के बावजूद मतदाता सूची में नाम जोड़ने को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उन्होंने बाराबंकी के इकरा गांव का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां कुछ ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में थे, जिनका उस गांव से संबंध नहीं था। इसकी शिकायत की, तो जवाब मिला कि अब पोर्टल बंद हो चुका है। मैंने चुनाव आयोग को 100 से अधिक शिकायतें की, लेकिन एक का भी जवाब नहीं मिला। 'भाजपा पर भरोसा था, लेकिन अब 2027 में उसके खिलाफ लड़ेंगे' स्मिता मिश्रा ने कहा कि एक समय उन्हें भाजपा पर भरोसा था, लेकिन चुनाव में कथित अनियमितताओं से उन्हें निराशा हुई है। उन्होंने कहा कि अब 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी नवयुवक दल मैदान में कम से कम 50 प्रत्याशी उतारेंगी। उन्होंने कहा, 'हमारी पार्टी का गठन 2014 में हुआ था। निर्भया कांड के समय हमने आंदोलन किया था। अब जरूरत है कि अपनी पार्टी से चुनाव लड़ें। कई लोगों से बातचीत चल रही है।' उन्होंने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान करणी सेना समेत कई संगठनों ने उनका समर्थन किया था। उनसे भी बात करेंगे। स्मिता मिश्रा ने कहा कि चुनाव में हार के बावजूद उनका सामाजिक काम बंद नहीं होगा। आईपी फाउंडेशन के जरिए स्कूलों में पढ़ाई, शिक्षकों की मदद और विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने का काम जारी रहेगा। यूजीसी का विरोध जारी रहेगा। इसके खिलाफ जनअभियान चलाती रहूंगी। स्वतंत्रता सेनानी परिवार से आती हैं स्मिता मिश्रा स्मिता का मायका उन्नाव जिले के कुरारी गांव में है। उनके पति ज्योतिषाचार्य आचार्य इंदु प्रकाश मिश्र हैं। उनका एक बेटा और दो बेटियां हैं। बेटियां कनाडा में रहती हैं। वहीं बेटा गुड़गांव में रहता है। उनका ससुराल बाराबंकी जिले के इकरा गांव में है। स्मिता मिश्रा के रामसुंदर नाथ शुक्ला पुलिस अधिकारी थे और उन्हें 26 मेडल मिले थे। एक स्पेशल अवॉर्ड मिला था कि वह जब तक जीवित रहेंगे, वर्दी पहनकर परेड में जा सकेंगे। उनके दादा शंभू रतन शुक्ला स्वतंत्रा सेनानी और नेताजी सुभाष चंद बोस के सहयोगी थी। ------------- ये पढ़ें - वाराणसी में भाजपा कार्यकर्ता और पुलिस में नोकझोंक:गोरखपुर में कड़ी टक्कर; 11 सीटों में भाजपा 5, सपा 3 जीती यूपी में विधान परिषद (MLC) चुनाव की मतगणना के दूसरे दिन मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। गोरखपुर में भाजपा के ध्रुव त्रिपाठी द्वितीय वरीयता के मतों की गिनती में निर्दलीय राजीव यादव से महज 880 वोटों से आगे चल रहे। अब तक 8 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं। इनमें भाजपा ने 5 और सपा ने 3 सीटें जीती हैं। पढ़िए पूरी खबर…

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