मोदी-शी की मुलाकात में क्या होगा बड़ा फैसला

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 12 सितंबर को संभावित मुलाकात पर नजर है। सात साल बाद शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना के बीच सीमा विवाद, वास्तविक नियंत्रण रेखा, व्यापार, निवेश और दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

Sep 10, 2026 - 11:54
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मोदी-शी की मुलाकात में क्या होगा बड़ा फैसला

दि राइजिंग न्यूज | नई दिल्ली | 10 सितंबर 2026

नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित द्विपक्षीय मुलाकात को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच 12 सितंबर को मुलाकात हो सकती है, हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार चीन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।यदि यह मुलाकात होती है तो वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली औपचारिक आमने-सामने की द्विपक्षीय बातचीत होगी। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में किया जाएगा।

सात साल बाद भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का संभावित भारत दौरा दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्रोत के अनुसार वह करीब सात साल बाद भारत आ सकते हैं। वर्ष 2020 में सीमा विवाद और गलवान घाटी की हिंसक घटना के बाद भारत और चीन के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हुआ था।गलवान की घटना के बाद दोनों देशों ने सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की थी। इसके साथ ही व्यापार और निवेश से जुड़े क्षेत्रों में भी कई तरह की सावधानियां और प्रतिबंध देखने को मिले। हालांकि पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिशें आगे बढ़ी हैं।

मोदी-शी की संभावित बैठक में सीमा विवाद अहम मुद्दा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति और सीमा विवाद का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल हो सकता है। दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मामलों को लेकर अलग-अलग स्तर पर बातचीत पहले से जारी है।विशेष प्रतिनिधियों और सीमा मामलों से जुड़े अधिकारियों के बीच बातचीत का उद्देश्य सीमा पर तनाव को कम करना और दोनों देशों के बीच स्थिरता कायम करना रहा है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व की संभावित बातचीत से सीमा पर शांति बनाए रखने और आपसी संवाद को आगे बढ़ाने को लेकर नई दिशा मिल सकती है।

व्यापार और आर्थिक संबंधों पर भी हो सकती है चर्चा

सीमा विवाद के अलावा भारत और चीन के बीच व्यापार तथा आर्थिक संबंध भी संभावित बैठक के महत्वपूर्ण विषय हो सकते हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सीमा तनाव का असर आर्थिक और निवेश

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