मायावती ने आकाश आनंद को बसपा से निकाला, ससुर का संन्यास भी नहीं आया काम!

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह बाहर करने का ऐलान किया है। यह फैसला उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के बाद सामने आया। इससे पहले यह बात सामने आई थी कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से अलग होने पर आकाश आनंद को पार्टी में जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद मायावती ने आकाश आनंद को राहत देने के बजाय उन्हें पार्टी से ही मुक्त कर दिया। मायावती ने अपने बयान में आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ पर निजी तथा पारिवारिक हितों को पार्टी और बहुजन आंदोलन से अधिक महत्व देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद को पहले महत्वपूर्ण संगठनात्मक पद से हटाया गया था और अब पार्टी से भी पूरी तरह अलग कर दिया गया है।

Sep 10, 2026 - 11:48
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मायावती ने आकाश आनंद को बसपा से निकाला, ससुर का संन्यास भी नहीं आया काम!

दि राइजिंग न्यूज | लखनऊ | 10 सितंबर 2026

बहुजन समाज पार्टी में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी प्रमुख मायावती ने बड़ा फैसला लिया है। मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को बहुजन समाज पार्टी से पूरी तरह बाहर करने का ऐलान किया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले लिए गए इस फैसले ने पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है और आकाश आनंद की भविष्य की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।यह फैसला उस घटनाक्रम के ठीक बाद सामने आया है, जिसमें आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की थी। बताया गया था कि मायावती ने आकाश आनंद के सामने यह शर्त रखी थी कि यदि अशोक सिद्धार्थ राजनीति से अलग हो जाते हैं, तो आकाश आनंद को पार्टी में पद और जिम्मेदारी दी जा सकती है। लेकिन संन्यास की घोषणा के बाद भी आकाश आनंद को पार्टी में राहत नहीं मिली।

अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद मायावती का बड़ा फैसला

मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह निर्णय काफी देर से लिया गया। उन्होंने कहा कि यदि यह फैसला पहले ले लिया गया होता तो बहुजन आंदोलन और आकाश आनंद के लिए लगातार विपरीत परिस्थितियां नहीं बनतीं।मायावती के अनुसार, समय पर संन्यास नहीं लेने के कारण उन्हें चुनावी तैयारियों और बहुजन आंदोलन से जुड़े कामों के बीच संगठन में सुधार के लिए कड़े फैसले लेने पड़े। उनके बयान से साफ संकेत मिला कि अशोक सिद्धार्थ का राजनीति में बने रहना पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष का कारण बना हुआ था।

मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर भी साधा निशाना

बसपा प्रमुख ने अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के फैसले को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें अपने दामाद आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य और बहुजन आंदोलन के व्यापक हित की चिंता होती, तो वह पहले ही राजनीति से अलग हो जाते।मायावती ने यह भी संकेत दिया कि उनके अनुसार अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से जुड़ाव केवल पारिवारिक चिंता तक सीमित नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि देर से लिया गया संन्यास इस बात की ओर इशारा करता है कि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थीं।

आकाश आनंद पर मायावती की नाराजगी खुलकर सामने आई

मायावती ने आकाश आनंद को लेकर भी अपनी नाराजगी सार्वजनिक की। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद को अपने राजनीतिक भविष्य से अधिक अपने ससुर के प्रति लगाव दिखाई दिया। मायावती ने यह भी कहा कि आकाश आनंद ने बहुजन समाज पार्टी की ओर से किए गए संदेश को दोबारा साझा करना भी उचित नहीं समझा।बसपा प्रमुख ने इस व्यवहार को पार्टी और बहुजन आंदोलन के प्रति गंभीरता की कमी से जोड़ते हुए सवाल उठाया। उनके अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के लिए पार्टी और आंदोलन से अधिक निजी या पारिवारिक रिश्ते महत्वपूर्ण हो जाएं, तो वह संगठन की सफलता के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम कैसे कर सकता है।

मायावती ने पार्टी के योगदान की दिलाई याद

मायावती ने अपने बयान में आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ को बहुजन समाज पार्टी के योगदान की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें और कई अन्य लोगों को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर दिया और जमीन से उठाकर महत्वपूर्ण मुकाम तक पहुंचाया।उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी और उसके नेतृत्व के प्रति जितना आभार व्यक्त किया जाए, वह कम है। मायावती के इस बयान से संकेत मिलता है कि वह आकाश आनंद और उनके ससुर के साथ अपने राजनीतिक संबंधों को अब पूरी तरह समाप्त करने के पक्ष में हैं।

पहले राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाया, अब पार्टी से भी किया बाहर

मायावती ने कहा कि आकाश आनंद को इससे पहले भी पार्टी और बहुजन आंदोलन की जिम्मेदारी से जुड़े महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संयोजक पद से मुक्त किया गया था। अब उन्होंने उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह अलग करने का फैसला लिया है।मायावती ने कहा कि यदि आकाश आनंद पार्टी और आंदोलन के बजाय निजी रिश्तों को अधिक महत्व देते हैं, तो उनके लिए पार्टी के हित में काम करना संभव नहीं होगा। इसी आधार पर उन्होंने आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने का ऐलान किया।

उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

बहुजन समाज पार्टी का यह फैसला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सामने आया है। ऐसे समय में आकाश आनंद को पार्टी से बाहर किए जाने से बसपा की आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक है। आकाश आनंद को लंबे समय से पार्टी में युवा नेतृत्व के प्रमुख चेहरे के तौर पर देखा जाता रहा है।अब मायावती के ताजा फैसले के बाद पार्टी के संगठन और चुनावी रणनीति में बदलाव की संभावना पर ध्यान रहेगा। हालांकि, आगे आकाश आनंद की राजनीतिक दिशा क्या होगी और वह किसी नए राजनीतिक मंच के साथ दिखाई देंगे या नहीं, इस बारे में दिए गए स्रोत में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।

मायावती के फैसले से बसपा में बढ़ी हलचल

आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने का फैसला बसपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। मायावती ने अपने बयान में निजी रिश्तों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के बीच स्पष्ट अंतर रखने की बात कही है।पार्टी प्रमुख के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि वह संगठन में किसी भी तरह की पारिवारिक या निजी प्रभाव की राजनीति को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आकाश आनंद के बाहर होने के बाद बहुजन समाज पार्टी में नेतृत्व और संगठन की जिम्मेदारियों को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • मायावती ने आकाश आनंद को बहुजन समाज पार्टी से बाहर करने का ऐलान किया।

  • यह फैसला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सामने आया है।

  • आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की थी।

  • मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के संन्यास को देर से लिया गया फैसला बताया।

  • मायावती ने आकाश आनंद के राजनीतिक रुख को लेकर भी नाराजगी जताई।

  • उन्होंने निजी रिश्तों को पार्टी और आंदोलन से ऊपर रखने पर सवाल उठाया।

  • आकाश आनंद को पहले राष्ट्रीय संयोजक के पद से भी हटाया गया था।

  • अब मायावती ने उन्हें पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने का फैसला लिया है।

  • मायावती ने बसपा के योगदान और संगठन के प्रति निष्ठा की बात कही।

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