निराला सभागार में 4 पुस्तकों का विमोचन:लखनऊ में गीत, गजल, यात्रा वृत्तांत और संस्मरणात्मक उपन्यास का विमोचन
साहित्यिक रचनाओं में जीवन के अनुभव, संवेदनाएं और विचारों की अभिव्यक्ति होती है। गीत, गजल, यात्रा वृत्तांत और संस्मरण के जरिए साहित्यकार समाज और जीवन के अलग-अलग पहलुओं को सामने रखते हैं। इसी क्रम में साहित्यिक दंपती त्रिवेणी प्रसाद दूबे और रमा दूबे की चार पुस्तकों का विमोचन किया गया। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था नवसृजन की ओर से गुरुवार को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में समारोह का आयोजन किया गया। इसमें त्रिवेणी प्रसाद दूबे की तीन और रमा दूबे की एक पुस्तक का विमोचन किया गया। गीत, गजल और यात्रा वृत्तांत की प्रस्तुति कार्यक्रम में त्रिवेणी प्रसाद दूबे के गीत संग्रह मन मेरा यायावर जैसा, यात्रा वृत्तांत संग्रह सरल सत्य की अद्भुत सुषमा और गजल संग्रह दिल सूफियाना हो गया' शामिल रहा। वहीं रमा दूबे के संस्मरणात्मक उपन्यास 'रैना बीते ना' का विमोचन किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी, वरेण्य अतिथि प्रो. हरि शंकर मिश्र और गोपाल कृष्ण शर्मा 'मृदुल' सहित साहित्यकारों ने पुस्तकों का लोकार्पण किया। साहित्यकारों ने पुस्तकों की समीक्षा की समारोह में डॉ. शिव मंगल सिंह 'मंगल' ने 'मन मेरा यायावर जैसा' पर विचार रखे। डॉ. सत्यदेव प्रसाद द्विवेदी 'पथिक' ने 'सरल सत्य की अद्भुत सुषमा' की समीक्षा की। मंजू सक्सेना ने 'दिल सूफियाना हो गया' और डॉ. सुधा मिश्रा ने 'रैना बीते ना' पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस दौरान त्रिवेणी प्रसाद दूबे ने अपनी लोकार्पित कृतियों से कुछ रचनाओं का पाठ भी किया।
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