निराश्रित माताओं ने मनाई दीपावली:जलाए खुशियों के दीपक, वृंदावन में माताएं बोली अंधेरे हो चुकी जिंदगी में मिली रोशनी
अंधेरा हो चुकी जिंदगी में खुशियों के दीप जले तो निराश्रित एवं विधवा माताएं खुशी से झूम उठीं। वृंदावन के गोपीनाथ मंदिर में शुक्रवार को सामाजिक संस्था सुलभ इंटरनेशनल द्वारा दीपावली महोत्सव मनाया गया। विधवा एवं निराश्रित माताओं के साथ मनाए गए इस महोत्सव में सैकड़ों माताएं खुशी के दीप जलाती नजर आईं। इस दौरान उन्होंने जमकर डांस भी किया। गोपीनाथ मंदिर में हुआ आयोजन वृंदावन में देश के अलग अलग शहरों से आकर कृष्ण भक्ति कर रही निराश्रित, बेसहारा एवं विधवा माताओं ने जिन्हें हाल के अतीत तक धार्मिक उत्सवों में शामिल होने से वंचित रखा जाता था शुक्रवार को ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर में आयोजित विशेष दिवाली समारोह में भाग लेकर मंदिर को रोशन कर दिया। यह कार्यक्रम सुलभ इंटरनेशनल द्वारा विधवा माताओं को समाज की मुख्यधारा में लाने और उनकी गरिमा बहाल करने की पहल के तहत आयोजित किया गया था। दीप से दीप जलाए शुक्रवार की शाम को 500 से ज्यादा निराश्रित एवं विधवा माताएं वृंदावन के प्राचीन गोपीनाथ मंदिर में एकत्रित हुईं। सुलभ इंटरनेशनल की कार्यकारी संयोजक नित्या पाठक ने यहां के आंगन में फूलों से बनाई गई रंगोली के बीच रखे दीपक को जलाया। इसके बाद माताओं ने दीप से दीप जलाए,एक दूसरे को दीपावली की शुभकामना दी। पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों की हजारों माताएं दशकों से वृंदावन में रह रही हैं और उन्हें अनुष्ठानों में भाग लेने की अनुमति नहीं थी। लेकिन 2012 में सुलभ इंटरनेशनल उनके साथ आई और इस तरह के त्यौहार धूमधाम से मनाया। माताएं ऐतिहासिक 500 वर्ष पुराने गोपीनाथ मंदिर में एकत्र हुईं, रंग-बिरंगे दीये जलाए और उल्लास के साथ दिवाली मनाई। किसी के पति का हुआ 25 साल पहले तो किसी के हुआ 40 साल पहले निधन कानपुर की रहने वाली कुमकुम ने बताया उनके पति का 1998 में निधन हो गया था। जीवन में अंधेरा छा गया,कुछ भी अच्छा नहीं लगता था। कुछ वर्ष पहले वृंदावन आईं यहां रहने लगीं। इस दौरान सुलभ इंटरनेशनल द्वारा मनाए जाने वाले त्योहारों में सहभागिता की तो मन में कुछ खुशी आई। पश्चिम बंगाल की रहने वाली गौरांगी दास ने बताया कि उनके पति का निधन 1980 में हो गया था। इसके बाद परिवार ने दूर कर दिया,वृंदावन आईं और कृष्ण भक्ति करने लगीं। लेकिन 2012 में जब पहली बार दिवाली मनाई तो खुशियां आए गईं। दिवाली ही नहीं होली भी खेलती हैं माताएं सुलभ इंटरनेशनल की कार्यकारी संयोजक श्रीमती नित्या पाठक ने कहा माताजी लोगों के साथ दीपावली का त्यौहार मना रहे हैं। 2012 में इसकी शुरुआत उनके ससुर विंदेश्वरी पाठक ने की थी। इस त्यौहार के अवसर पर माताओं को साड़ी,मिठाई दी गई है। इनकी खुशी देखकर अलग ही अनुभूति होती है। नित्या पाठक ने बताया यह माताएं अब दिवाली ही नहीं होली और रक्षाबंधन का भी त्यौहार मनाती हैं।
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