पोस्टर मामले में दर्ज मुकदमे की धाराओं पर उठाए सवाल:पूर्व IPS ने डीजीपी को भेजा पत्र, मुकदमे की विवेचना की मांग
मेरठ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पोस्टर पर पेट्रोल डालकर आग लगाने के कथित प्रयास के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने डीजीपी को पत्र भेजकर मुकदमे की विवेचना कराए जाने की मांग की है। उन्होंने मुकदमे में लगाई गई धाराओं और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार पुलिस टीमें गठित किए जाने की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। 27 अगस्त को कमिश्नरी चौराहे पर हुआ था प्रदर्शन 27 अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खिलाफ लगाए गए कथित विवादित होर्डिंग के विरोध में समाजवादी अधिवक्ता सभा से जुड़े लोग कमिश्नरी चौराहे पर जुटे थे। करीब 15 अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नारेबाजी की। इसी दौरान मुख्यमंत्री के पोस्टर पर पेट्रोल डालकर आग लगाने का प्रयास किया गया। पोस्टर में आग लगने के बाद मौके पर मौजूद दरोगा ने उसे कब्जे में लेकर आग बुझाने की कोशिश की। इस दौरान दरोगा मामूली रूप से झुलस गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लिया। खुफिया विभाग की ओर से भी घटनाक्रम की रिपोर्ट पुलिस अधिकारियों को दी गई। अधिवक्ता समेत 13 लोगों पर मुकदमा एसपी सिटी के निर्देश पर सिविल लाइंस थाने में अधिवक्ता अनिल वर्मा और 12 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान शुरू की। गिरफ्तारी के लिए चार पुलिस टीमें गठित कर दबिश दी गई। अगले दिन पुलिस को सूचना मिली कि समाजवादी अधिवक्ता सभा से जुड़े कुछ लोग दोबारा मुख्यमंत्री का पोस्टर और पुतला जलाने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया। अमिताभ ठाकुर ने धाराओं पर उठाए सवाल अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र में कहा है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 356, 287 और धारा 7 दंड विधि संशोधन अधिनियम लगाए जाने का प्रथमदृष्टया पर्याप्त आधार स्पष्ट नहीं होता। उन्होंने मानहानि से जुड़े कानूनी तत्वों की भी दोबारा जांच की मांग की है। उनके मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता की धारा 287 के लिए लापरवाही और मानव जीवन को खतरे में डालने जैसे आवश्यक तत्व घटना से किस तरह जुड़े हैं, यह पुलिस की जांच आख्या में स्पष्ट नहीं दिखता। इसी तरह धारा 7 दंड विधि संशोधन अधिनियम के इस्तेमाल पर भी उन्होंने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुनर्विचार की मांग की है। चार टीमों से गिरफ्तारी पर भी पुनर्विचार की मांग अमिताभ ठाकुर ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार पुलिस टीमों के गठन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने डीजीपी से मुकदमे में लगाई गई धाराओं की कानूनी स्थिति और गिरफ्तारी के लिए की जा रही पुलिस कार्रवाई का उच्चस्तरीय परीक्षण कराने की मांग की है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)