शिक्षक-SDM विवाद, मंत्री धर्मपाल से मिलेंगे शिक्षक, कार्यवाही की मांग:शिक्षकों को 'भूखे-नंगे और कुत्ता' कहने वाले आंवला SDM के खिलाफ आर-पार की जंग
बरेली के आंवला में शिक्षकों को कथित रूप से 'भूखे-नंगे' और 'कुत्ता' कहने वाले एसडीएम सुशील मिश्रा के खिलाफ शिक्षकों ने मोर्चा खोल दिया है। शिक्षकों ने अब इस अपमान के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। शिक्षक आज कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह से मुलाकात कर आरोपी एसडीएम के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की मांग करेंगे। इससे पहले नाराज शिक्षकों ने शुक्रवार को डीएम अविनाश सिंह को ज्ञापन सौंपकर अफसर पर सख्त एक्शन लेने की गुहार लगाई थी। लंच पैकेट लेते वक्त हुआ विवाद, माफी मांगने के बाद भी नहीं थमा गुस्सा
इन दिनों देशभर में जनगणना कार्य को लेकर ब्लॉक और तहसील स्तर पर प्रगणकों की ट्रेनिंग चल रही है। शुक्रवार को आंवला में ट्रेनिंग के दौरान लंच ब्रेक हुआ, जहां शिक्षक कतार में लगकर अपना भोजन पैकेट ले रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान एसडीएम सुशील मिश्रा वहां पहुंचे और शिक्षकों पर भड़कते हुए अभद्र टिप्पणी कर दी। इस अपमान से आहत होकर शिक्षकों ने तुरंत भोजन का बहिष्कार कर दिया और धरने पर बैठ गए। विवाद बढ़ता देख एसडीएम ने बाद में माफी भी मांगी, लेकिन शिक्षकों का साफ कहना है कि गुरुजनों के साथ किया गया ऐसा अशोभनीय व्यवहार किसी भी सूरत में बर्दाश्त के काबिल नहीं है। त्योहार पर भी पूरी निष्ठा से ड्यूटी, फिर जानवरों जैसा बर्ताव क्यों?
शिक्षकों का कहना है कि चाहे विधानसभा चुनाव हों, पंचायत चुनाव, एसआईआर (SIR) या फिर जनगणना का काम, वे हर राष्ट्रीय दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाते हैं। दीपावली के पर्व पर भी सभी शिक्षक अपनी ट्रेनिंग पूरी कर रहे हैं, लेकिन इसके बदले उनके साथ जानवरों जैसा सलूक किया जा रहा है। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि केवल खोखली माफी से बात नहीं बनेगी, वे आज दोपहर 12 बजे कैबिनेट मंत्री से मिलकर अपनी बात रखेंगे और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए ठोस कार्रवाई करवा कर ही दम लेंगे। मुख्यालय अटैच करने की मांग, मांग न मानने पर बहिष्कार की चेतावनी
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के नेता नरेश गंगवार ने कड़े शब्दों में मांग की है कि आरोपी एसडीएम को तत्काल प्रभाव से जिला मुख्यालय से अटैच किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। शिक्षक प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि जब तक एसडीएम को पद से हटाकर अटैच नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अगर प्रशासन ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाया, तो शिक्षक जिले भर में जनगणना कार्य का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। प्रदेशव्यापी आंदोलन की आहट, प्रशासन और सरकार के सामने बड़ी चुनौती
जनगणना जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य के बीच उपजा यह विवाद अब शासन-प्रशासन के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। यदि शिक्षक लामबंद होकर कार्य बहिष्कार करते हैं, तो बरेली ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में ट्रेनिंग और गणना का काम ठप पड़ सकता है। ऐसे में समय रहते शिक्षकों के मान-सम्मान को बहाल करते हुए गतिरोध सुलझाना और जनगणना कार्य को पटरी पर बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित हो रहा है।
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