गोरखपुर सिविल-कोर्ट में चैंबर से लेकर अस्पताल तक की मांग:अधिवक्ताओं ने प्रशासनिक न्यायमूर्ति को सौंपा मांगपत्र

Nov 05, 2026 - 17:43
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गोरखपुर सिविल-कोर्ट में चैंबर से लेकर अस्पताल तक की मांग:अधिवक्ताओं ने प्रशासनिक न्यायमूर्ति को सौंपा मांगपत्र
गोरखपुर के सिविल कोर्ट में अधिवक्ताओं के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने और न्यायाधीशों और कर्मचारियों की कमी समेत कई समस्याओं को लेकर बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट का प्रतिनिधिमंडल प्रशासनिक न्यायमूर्ति पंकज भाटिया से मिला। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उमापति उपाध्याय और मंत्री अनुज अस्थाना के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें विभिन्न मांगों से संबंधित पत्र सौंपा। इसमें अधिवक्ताओं के लिए नए चैंबर बनवाने से लेकर न्यायालय परिसर में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने तक की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सिविल कोर्ट में बड़ी संख्या में अधिवक्ता विधि व्यवसाय करते हैं, लेकिन उनकी संख्या के अनुपात में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। खासकर नए अधिवक्ताओं को बैठने के लिए जगह की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में न्यायालय परिसर में नए अधिवक्ता चैंबर का निर्माण कराया जाना बेहद जरूरी है। इसके लिए प्रशासनिक न्यायमूर्ति से संस्तुति प्रदान कर आवश्यक कार्रवाई कराने का अनुरोध किया गया। न्यायाधीशों और कर्मचारियों की कमी से कामकाज प्रभावित प्रतिनिधिमंडल ने न्यायालय में स्वीकृत पदों के सापेक्ष न्यायाधीशों की कमी का मुद्दा भी उठाया। कहा कि निर्धारित संख्या में न्यायाधीशों की तैनाती नहीं होने से न्यायिक कामकाज और मुकदमों के निस्तारण पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा न्यायालयों में कर्मचारियों की भी काफी कमी है। इससे मुकदमों के प्रबंधन और निस्तारण में परेशानी होती है। प्रतिनिधिमंडल ने आवश्यक पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति कराने की मांग की। सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और अस्पताल की सुविधा की मांग बार एसोसिएशन ने न्यायालय परिसर की सफाई व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि सफाई के लिए कर्मचारियों की संख्या काफी कम है। इस कारण पूरे परिसर में नियमित और समुचित सफाई नहीं हो पा रही है। सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई। इसके साथ ही अधिवक्ताओं के स्वास्थ्य और उपचार से जुड़ी सुविधाओं को लेकर भी मांग रखी गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अधिवक्ताओं के लिए बीमारी की स्थिति में बीमा और मेडिक्लेम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। न्यायालय परिसर में अस्पताल की बेहतर व्यवस्था के साथ डॉक्टरों की नियुक्ति भी जरूरी है। इससे किसी भी आपात स्थिति में न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और वादकारियों को समय पर उपचार मिल सकेगा। प्रतिनिधिमंडल में कोषाध्यक्ष प्रवीण कुमार शुक्ला, संयुक्त मंत्री आशुतोष दुबे और कार्यकारिणी सदस्य अमित पांडेय शामिल रहे।

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