केले के रेशे से 6-7 तरह के प्रोडक्ट:बचा कूचा भी नहीं जाता बर्बाद; UPITS में सिद्धार्थनगर की महिलाओं का हुनर
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों की पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों की झलक देखने को मिल रही है। सिद्धार्थनगर के स्टॉल पर केले के रेशे से तैयार किए गए प्रोडक्ट लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। खास बात यह है कि इनके निर्माण में बचने वाला रेशा भी बेकार नहीं जाता। सिद्धार्थनगर से आईं सीमा देवी ने बताया कि केले के तने से रेशा निकालकर उससे अलग-अलग सामान तैयार किए जाते हैं। पहले यह काम पूरी तरह हाथ से किया जाता था, लेकिन अब मशीन की मदद से रेशा निकालने और उसे तैयार करने का काम किया जा रहा है।
पहले हाथ से बनता था, अब मशीन से निकलता है रेशा
सीमा देवी के मुताबिक, केले के रेशे को मशीन में प्रोसेस किया जाता है। इससे रेशे का गुच्छा तैयार होता है। पहले इसे छोटे-छोटे हिस्सों में हाथ से तैयार किया जाता था। इसके बाद मशीन से इसकी सिलाई की जाती है।
उन्होंने बताया कि इस काम से करीब 6 से 7 तरह के सामान तैयार किए जाते हैं। यानी केले के जिस हिस्से को सामान्य तौर पर बेकार समझा जाता है, उसका इस्तेमाल उपयोगी उत्पाद बनाने में किया जा रहा है। बचा रेशा भी काम आता है, बनाते हैं घोंसला
इस काम की खासियत इसका वेस्ट मैनेजमेंट भी है। सीमा देवी ने बताया कि सामान की सिलाई के बाद जो थोड़ा-बहुत रेशा या कूचा बचता है, उससे पक्षियों के लिए घोंसले तैयार किए जाते हैं। इस तरह केले के रेशे से तैयार होने वाले प्रोडक्ट में बचा हिस्सा भी उपयोग में आ जाता है।
नोएडा में पहली बार पहुंचा स्टॉल
सिद्धार्थनगर का यह समूह पहली बार नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में पहुंचा है। इससे पहले वे कानपुर और कपिलवस्तु महोत्सव में अपने उत्पाद प्रदर्शित कर चुके हैं। ट्रेड शो में ऐसे स्थानीय उत्पादों को खरीदारों और दूसरे बाजारों तक पहुंचाने का मौका मिल रहा है। सिद्धार्थनगर का केला फाइबर प्रोडक्ट इसी स्थानीय हुनर को बाजार से जोड़ने की कोशिश का उदाहरण है।
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