पटाखों से घायल बच्चों का मुफ्त इलाज करेगा एएसजी:प्रयागराज में 14 नवंबर तक चलेगा अभियान, जरूरत पड़ने पर सर्जरी की सुविधा
प्रयागराज में दिवाली पर पटाखे जलाते समय बच्चों की आंखों को चोट पहुंचने पर अब इलाज के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। एएसजी आई हॉस्पिटल ने बच्चों की आंखों की सुरक्षा के लिए 'सुरक्षित आंखें, सुरक्षित दिवाली' अभियान शुरू किया है। इसके तहत पटाखों से आंखों में चोट लगने वाले 15 साल से कम उम्र के बच्चों का सीएसआर पहल के तहत मुफ्त इलाज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बच्चों को प्राथमिक उपचार से लेकर आपातकालीन नेत्र देखभाल और सर्जरी तक की सुविधा मिलेगी। यह अभियान 4 नवंबर से 14 नवंबर 2026 तक देश के 95 से अधिक शहरों में संचालित होगा। इसके लिए एएसजी आई हॉस्पिटल के 200 से अधिक केंद्रों पर इलाज की व्यवस्था की गई है। प्रयागराज के सिविल लाइंस स्थित एएसजी आई हॉस्पिटल में भी बच्चों को यह सुविधा मिलेगी। परिजन इलाज और नजदीकी सेंटर की जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800 1200 111 पर संपर्क कर सकते हैं। अस्पताल के अनुसार दिवाली के दौरान पटाखों से आंखों में चोट लगने के मामले बढ़ जाते हैं। इनमें बच्चों की संख्या काफी अधिक होती है। पटाखों से निकलने वाली चिंगारी और बारूद के कण आंखों के कॉर्निया सहित अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर आंखों की रोशनी भी जा सकती है। पिछले साल दिवाली के दौरान एएसजी के विभिन्न केंद्रों पर पटाखों से आंखें झुलसने वाले 500 से अधिक बच्चों का इलाज किया गया था। एएसजी आई हॉस्पिटल के सीओओ (उत्तर प्रदेश) डॉ. प्रत्यूष रंजन ने कहा कि पटाखों से होने वाली ज्यादातर चोटों से बचाव संभव है। हालांकि, दुर्घटना होने पर शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। आंख में चोट लगने पर उसे रगड़ने या घरेलू उपचार करने के बजाय तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। प्रयागराज सेंटर की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. फरनाज कौसर समेत डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. मधुमिता प्रसाद और डॉ. प्रियंका चन्ना ने भी लोगों से सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि छोटी दिखने वाली चोट भी आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचा सकती है।
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