मऊ में चकबंदी के विरोध में उतरे ग्रामीण:ग्रामीण बोले पहले सड़क-नाली बनवाइए, फिर कराइए
मऊ जिले के रैकवारेडीह गांव में चकबंदी को लेकर शुक्रवार को बुलाई गई खुली बैठक में ग्रामीणों ने जमकर विरोध जताया। किसानों ने अधिकारियों के सामने चकबंदी प्रक्रिया निरस्त करने की मांग रखी। करीब शाम 4:30 बजे तक चली बैठक हंगामे के बीच खत्म हुई, लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका। 75 प्रतिशत किसान चकबंदी के विरोध में होने का दावा बैठक में मुख्य राजस्व अधिकारी (CRO), SDM सदर और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। ग्रामीणों का दावा है कि गांव के करीब 75 प्रतिशत किसान चकबंदी नहीं चाहते, जबकि लगभग 25 प्रतिशत इसके पक्ष में हैं। विरोध और विवाद को देखते हुए प्रशासन ने यह खुली बैठक बुलाई थी। ग्राम सभा रैकवारेडीह के रहने वाले कमांडो विजय सिंह ने बताया कि किसानों के हित में साल 2015 में चकबंदी शुरू की गई थी, लेकिन ग्रामीण शुरुआत से ही इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांव में सड़क, नाली और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में चकबंदी से पहले इन समस्याओं का समाधान होना चाहिए। 2017 और 2022 में भी विरोध का दावा विजय सिंह के मुताबिक, ग्रामीणों ने साल 2017 और 2022 में भी चकबंदी का विरोध किया था। उनका दावा है कि साल 2022 में अधिकारियों की रिपोर्ट में किसानों की असहमति दर्ज की गई थी और गांव को चकबंदी से बाहर करने की सिफारिश की गई थी। उन्होंने चकबंदी प्रक्रिया में अनियमितता, पैसे मांगने और किसानों के चकों में मनमाने बदलाव करने के आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि नियम के मुताबिक, किसानों को पर्चा पांच देने और जमीन का सर्वे करने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए, लेकिन गांव में इसे पारदर्शी तरीके से नहीं अपनाया गया। आंगनबाड़ी केंद्र और पोखरी की जमीन पर कब्जे का मुद्दा उठाया विजय सिंह ने गांव के आंगनबाड़ी केंद्र और पोखरी की जमीन पर कथित कब्जे का मुद्दा भी अधिकारियों के सामने रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी जमीन पर कब्जे से गरीब परिवारों के बच्चों को परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने इन मामलों की जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों ने अधिकारियों से कहा कि चकबंदी को लेकर गांव में पहले से तनाव और मुकदमेबाजी की स्थिति है। ऐसे में प्रक्रिया आगे बढ़ने से विवाद और बढ़ सकता है। उन्होंने किसानों की वास्तविक सहमति और आपत्तियों के आधार पर फैसला लेने की मांग की। फिलहाल बैठक में ग्रामीणों ने अपना विरोध दर्ज करा दिया है। प्रशासन की ओर से आपत्तियों और चकबंदी से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
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