स्मृति ईरानी, हरीश द्विवेदी, वरुण गांधी जा सकते हैं राज्यसभा:अक्टूबर में होगी घोषणा; मौजूदा 4 सदस्यों को फिर मिल सकता है टिकट
राज्यसभा में यूपी कोटे से 10 सीटों पर होने वाले चुनाव में भाजपा को 8 और सपा को 2 सीटें मिलना तय है। अक्टूबर के पहले हफ्ते में भाजपा अपने प्रत्याशियों के नामों का आधिकारिक ऐलान कर सकती है। पार्टी सूत्रों की मानें, तो हाल ही में राष्ट्रीय संगठन में पद पाने वाले दो बड़े चेहरों- पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी का यूपी से राज्यसभा जाना लगभग तय हो चुका है। इनके अलावा वरुण गांधी को भी पार्टी राज्यसभा भेज सकती है। स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी का नाम सबसे आगे क्यों? भाजपा में एक परंपरा रही है कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिवों को राज्यसभा में भेजा जाता है। इससे नेताओं को संसद में बात रखने का मौका मिलता है। देश भर में सांगठनिक दौरों के दौरान उनका कद और प्रोटोकॉल बना रहता है। स्मृति ईरानी 2010 से 2013 तक भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रहीं। 2014 में अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। हालांकि, हार गई थीं, लेकिन पार्टी ने उनका कद देखते हुए मोदी सरकार 1.0 में उन्हें मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्रालय सौंपा था। 2019 में उन्होंने अमेठी में राहुल गांधी को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की और दोबारा केंद्रीय मंत्री बनीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा से हारने के बाद वे सामान्य कार्यकर्ता की तरह संगठन के काम में लगी रहीं। हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दी। ऐसे में पार्टी उन्हें यूपी के कोटे से संसद (राज्यसभा) भेजने की पूरी तैयारी में है। हरीश द्विवेदी ने 2004 तक आरएसएस के पूर्णकालिक विस्तारक के रूप में जमीन पर काम किया। बाद में भाजयुमो के प्रदेश महामंत्री और फिर प्रदेश अध्यक्ष बने। 2012 में बस्ती सदर से विधानसभा का चुनाव लड़े, लेकिन तीसरे नंबर पर रहे। 2014 और 2019 में वे लगातार 2 बार बस्ती से सांसद चुने गए। संगठन में उनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है। वे पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में राष्ट्रीय सचिव रहे। असम और राजस्थान के चुनावों में अहम भूमिका निभाई। हाल ही में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाकर कर्नाटक और बिहार जैसे बड़े राज्यों का प्रभारी बनाया गया है। संगठन में उनके बढ़ते कद के चलते उनका राज्यसभा जाना लगभग पक्का माना जा रहा है। बाकी 6 सीटों पर ये 10 नेता रेस में 2027 चुनाव को लेकर जातीय समीकरण साधने का प्लान 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा इस राज्यसभा चुनाव में सोशल इंजीनियरिंग का खास ख्याल रखेगी। सूत्रों के मुताबिक, 8 सीटों के लिए 1-2 ब्राह्मण, 1-2 ठाकुर, 3-4 पिछड़े (OBC) और 1-2 दलित चेहरों को मौका दिया जा सकता है। --------------------------- यह खबर भी पढ़ें- भाजपा साथ नहीं देगी तो संसद में शून्य होगी बसपा:राज्यसभा की 10 सीटों पर अक्टूबर में चुनाव राज्यसभा में यूपी कोटे की 31 सीटें हैं। विधानसभा में सदस्य संख्या के लिहाज से भाजपा को 8 और सपा को 2 सीटें मिलना तय है। राज्यसभा में अभी सपा के एक सांसद हैं। यानी एक सीट का फायदा होगा। वहीं, बसपा अपने राजनीतिक इतिहास में पहली बार राज्यसभा में शून्य हो जाएगी। पढ़िए पूरी खबर…
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