आगरा में विधायक-सांसद रहते 4 जनप्रतिनिधियों का निधन:चारों भाजपा के जनप्रतिनिधि रहे; इसमें 3 विधायक, 1 राज्यसभा के सांसद

Sep 26, 2026 - 14:01
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आगरा में विधायक-सांसद रहते 4 जनप्रतिनिधियों का निधन:चारों भाजपा के जनप्रतिनिधि रहे; इसमें 3 विधायक, 1 राज्यसभा के सांसद
आगरा में फतेहाबाद सीट से 4 बार विधायक रहे छोटेलाल वर्मा का दो दिन पहले 24 सितंबर को निधन हो गया। वह आगरा के ऐसे पहले विधायक नहीं हैं, जिनका जनप्रतिनिधि रहते निधन हुआ। इनसे से पहले 4 ऐसे जनप्रतिनिधि रहे हैं, जो कार्यकाल पूरा होने से पहले दुनिया छोड़ गए। इनमें 3 विधायक और और एक राज्यसभा सांसद रहे हैं। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि इन चारों जनप्रतिनिधियों का संबंध भाजपा से रहा। पहले चारों जनप्रतिनिधियों के नाम जानिए… अब इनके बारे में सिलसिलेवार जानिए… हरद्वार दुबे हरद्वार दुबे भाजपा के काफी वरिष्ठ नेता रहे। मूल रूप से बलिया जिले के रहने वाले हरद्वार दुबे आगरा की कैंट सीट (तब सामान्य सीट थी) से दो बार विधायक रहे। 1989 में उन्होंने कांग्रेस के कृष्णवीर कौशल को 3106 वोटों से हराया था। इसके बाद 1991 में उन्होंने जनता दल के शिव चरण लाल मानव को 13898 वोटों से हराया। इस चुनाव को जीतने के बाद वे भाजपा की कल्याण सिंह सरकार में वित्त राज्यमंत्री बने थे। नवंबर 2020 में उन्हें भाजपा ने राज्यसभा भेजा। मगर, कार्यकाल पूरा करने से पहले ही 26 जून 2023 को उनका निधन हो गया। वे भाजपा में संगठन के कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे थे। 1988 में महानगर अध्यक्ष रहे थे। सत्य प्रकाश विकल सत्य प्रकाश विकल भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे। आगरा की उत्तर विधानसभा सीट से वे लगातार 5 बार विधायक चुने गए। क्षेत्र की जनता पर उनकी पकड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने सिर्फ अपना पहला चुनाव हारा। विधायक चुनने के बाद उन्हें कोई चुनौती नहीं दे पाया। उन्होंने अपना पहला भाजपा के टिकट पर उत्तर विधानसभा सीट से 1980 में लड़ा। यह चुनाव वे कांग्रेस प्रत्याशी ओम प्रकाश जिंदल से 4346 वोटों से हार गए थे। इसके बाद 1985 में वे फिर से भाजपा के टिकट पर इसी सीट से फिर से मैदान में उतरे। यह चुनाव उन्होंने सिर्फ 145 वोटों से जीता था। इसके बाद उनकी जीत का सफर उनकी मौत के साथ ही रुका। 1989 में कांग्रेस के सतीश चंद्र गुप्ता को 14503 वोटों से, 1991 में कांग्रेस के ओम प्रकाश जिंदल को 24550 वोटों से, 1993 में कांग्रेस के ओम प्रकाश जिंदल को 23756 वोटों से और 1996 में कांग्रेस के बांकी बिहारी अग्रवाल को 19354 वोटों से हराया। इस विधानसभा के कार्यकाल को पूरा करने से पहले ही 1998 में उनका निधन हो गया। जगन प्रसाद गर्ग अपने सरल स्वभाव के चलते पार्टी और जनता में अपनी अलग पहचान रखने वाले जगन प्रसाद गर्ग का राजनीतिक सफर भाजपा से शुरू हुआ और भाजपा पर ही खत्म हुआ। सत्य प्रकाश विकल के निधन के बाद उत्तर विधानसभा सीट खाली होने पर 1998 में हुए उपचुनाव में भाजपा ने पहली बार उन्हें इसी से अपना प्रत्याशी घोषित किया। जगन प्रसाद गर्ग ने यह चुनाव जीता। इसके बाद वर्ष 2002 में उन्होंने कांग्रेस के गोविंद अगवाल को 12749 वोटों से, 2007 में बसपा के सर्व प्रकाश कपूर को 8263 वोटों से, 2012 में बसपा के राजेश कुमार अग्रवाल को 23356 वोटों से और 2017 में बसपा के ज्ञानेंद्र गौतम को 86320 वोटों से हराया था। इस विधानसभा का कार्यकाल पूरा करने से पहले ही 10 अप्रैल 2019 को उनका निधन हो गया। छोटे लाल वर्मा छोटेलाल वर्मा 4 बार विधायक चुने गए। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1993 में भाजपा से की। इसके बाद वह 2002 में दूसरी बार भाजपा से विधायक चुने गए। 2007 के चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काट दिया। इसके बाद वे समाजवादी पार्टी में चले गए। चुनाव लड़े, लेकिन हार मिली। 2012 के चुनाव में छोटेलाल ने एक बार फिर पार्टी बदल दी। यह चुनाव उन्होंने बसपा के टिकट पर लड़ा और चुनाव जीते। लेकिन, 2022 के चुनाव से पहले वे भाजपा में शामिल हो गए और चौथी बार चुनाव जीतकर विधायक बने। इस विधानसभा का कार्यकाल पूरा करने से पहले 24 सितंबर 2026 को उनका निधन हो गया।

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