चुनावी हार के बाद आयोग पर निशाना साधने का आरोप:संजय निषाद बोले- हार से हताश विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर जनता को गुमराह कर रहा
निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने रविवार को विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस चुनाव जीतने पर अपनी पीठ थपथपाती हैं, लेकिन हार मिलने पर ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाने लगती हैं। एसआईआर को लेकर विपक्ष के विरोध को भी उन्होंने जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। जीत पर श्रेय, हार पर ईवीएम को दोष देने का आरोप
डॉ. निषाद ने कहा कि जनता से लगातार हार मिलने के बाद विपक्षी दल हताश हैं। संविधान की दुहाई देने वाले दल ही संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उसके रुख को देश जानता है। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन पर भी निशाना साधा।
मंत्री ने कहा कि जिस ईवीएम से कांग्रेस केंद्र और कई राज्यों में सत्ता में आई, उसी को अब ब्लैक बॉक्स बताकर चुनाव प्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, सपा प्रमुख अखिलेश यादव को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह भी इसी ईवीएम के जरिए सांसद और मुख्यमंत्री बने थे। एसआईआर पर बोले- नाम जुड़वाने की व्यवस्था पहले से मौजूद एसआईआर को लेकर डॉ. निषाद ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण पहली बार नहीं हो रहा है। उनके अनुसार, देश में 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में भी यह प्रक्रिया हो चुकी है।
उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के दौरान जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में छूट गए थे, उन्हें नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म भरने का अवसर दिया गया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने भी फॉर्म-6 को लेकर चुनाव आयोग के कदम को सही माना है।
मंत्री ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वा सकते हैं। ऐसे में विपक्ष को इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने की जरूरत नहीं है। एनडीए को जनता का समर्थन मिलने का दावा डॉ. निषाद ने कहा कि जनता ने एनडीए सरकार पर विश्वास जताया है और उसे अपना आशीर्वाद दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता की चाह में सपा और कांग्रेस जनता के फैसले का भी अपमान कर रही हैं।
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