एटा में 48 घंटे की बारिश से फसलें बर्बाद:बाजरा, धान, गोभी और आलू की फसलें चौपट; पानी निकासी न होने से किसान परेशान

Sep 28, 2026 - 10:03
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एटा में 48 घंटे की बारिश से फसलें बर्बाद:बाजरा, धान, गोभी और आलू की फसलें चौपट; पानी निकासी न होने से किसान परेशान
एटा में पिछले 48 घंटे से लगातार हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से कई क्षेत्रों में फसलें प्रभावित हुई हैं। पानी निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से खेतों में जलभराव हो गया है। बाजरा की फसल कई जगह जमीन पर बिछ गई है, जबकि धान की कच्ची बालियां पानी में डूबी हैं। गोभी और आलू के खेतों में भी पानी भरने से फसल सड़ने का खतरा पैदा हो गया है। निधौली, आवागढ़, जलेसर, मारहरा, अलीगंज, जैथरा और सकीट क्षेत्र में बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचा है। किसान खेतों से पानी निकालने के लिए परेशान हैं। उनका कहना है कि खेतों में लगातार पानी जमा रहा तो फसलों को बचाना मुश्किल होगा। वास्तविक नुकसान बारिश रुकने और खेतों से पानी निकलने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। धान की कच्ची बालियां पानी में डूबीं अलीगंज क्षेत्र में धान की फसल को लेकर किसानों की चिंता ज्यादा है। धान की बालियां अभी पूरी तरह पक नहीं पाई हैं। पानी में डूबे रहने से दाने के विकास पर असर पड़ने और उपज कम होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहा तो बालियां गलने और दाना खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा। भग्गू, गलारपुर, लक्ष्मण नगला, खानपुर, अल्लापुर, महमदपुर और करनपुर समेत कई गांवों में बड़े क्षेत्र में बाजरा की खेती होती है। बारिश के साथ चली तेज हवाओं से कई खेतों में बाजरा की फसल जमीन पर गिर गई है। जमीन से लगी बालियों और फलियों में मिट्टी चिपकने से फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। लगातार नमी बनी रहने पर फफूंद और अन्य रोग भी लग सकते हैं। किसानों का कहना है कि अब गिरी हुई फसल को दोबारा खड़ा करना संभव नहीं है। खेत सूखने के बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। गोभी के खेतों में जलभराव, फसल सड़ने का खतरा अगौनापुर, पचंदा, जुनेदपुर, कालिंजर, हरसिंहपुर, पलरा, डंडा और फतेहपुर में सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। बारिश के कारण गोभी के खेतों में पानी भर गया है। किसानों के मुताबिक गोभी की फसल ज्यादा समय तक जलभराव सहन नहीं कर पाती। पानी जमा रहने से जड़ें गलने लगती हैं और फसल खराब हो सकती है। किसानों को आशंका है कि बारिश रुकने के बाद धूप निकलने पर भी यदि खेतों से पानी नहीं निकला तो गोभी तेजी से खराब हो सकती है। एक-दो दिन में जलनिकासी नहीं हुई तो खड़ी फसल को बचाना मुश्किल होगा। पुलिया बंद होने से नहीं निकल रहा खेतों का पानी किसानों की परेशानी केवल बारिश तक सीमित नहीं है। खेतों से पानी निकालने वाली नालियां और कुछ पुलिया बंद होने के कारण जलभराव की स्थिति और गंभीर हो गई है। किसानों का कहना है कि जिन रास्तों से पहले खेतों का पानी बाहर निकल जाता था, उनमें रुकावट होने से पानी खेतों में ही जमा है। एक तरफ लगातार बारिश हो रही है और दूसरी ओर जलनिकासी का रास्ता बंद होने से किसानों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है। खेतों में जितने लंबे समय तक पानी रहेगा, फसल को नुकसान की आशंका उतनी ही बढ़ेगी। चारा भी भीगा, पशुपालकों की चिंता बढ़ी बारिश का असर पशुओं के चारे पर भी पड़ा है। खेतों में रखा चारा भीगने से उसके खराब होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि चारा खराब हुआ तो पशुओं के लिए अलग से चारे की व्यवस्था करनी पड़ेगी। इससे खेती के साथ पशुपालन पर निर्भर परिवारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। किसान सुरेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि उनके परिवार समेत गांव के लोगों ने 250 बीघा से अधिक क्षेत्र में धान की खेती की है। लगातार बारिश के कारण धान की बालियां पानी में डूबी हुई हैं। अभी दाना पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। पानी नहीं निकला तो बालियां गलने और दाना खराब होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि गोभी की फसल में भी पानी भर गया है। बारिश रुकने के बाद धूप निकलने पर यदि खेतों से पानी नहीं निकला तो गोभी तेजी से खराब हो सकती है। जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से समस्या और बढ़ गई है। फसल खराब होने पर किसानों के सामने लागत तक निकालने का संकट खड़ा हो सकता है। फर्दपुरा के किसान रवींद्र ने बताया कि बारिश और तेज हवा के कारण कई जगह बाजरा जमीन पर गिर गया है। फसल जमीन से लगने के कारण उसमें मिट्टी चिपक रही है। लगातार नमी बनी रही तो फसल खराब होने की आशंका है। डीएम ने सर्वे के दिए निर्देश एटा की जिलाधिकारी एम. अरुणमोली ने सभी उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों को प्रभावित फसलों का आकलन कराने के निर्देश दिए हैं। राजस्व अधिकारियों की ओर से गांव-गांव जाकर किसानों की फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। अधिकारियों को नुकसान का आंकलन कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, ताकि नियमानुसार प्रभावित किसानों को सहायता दिलाई जा सके।

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