संभल हिंसा केस में जफर अली को नोटिस:3 अक्टूबर को सिटी मजिस्ट्रेट ने तलब किया, पूछा- 6 महीने के लिए 20 हजार से पाबंद क्यों न करें
संभल हिंसा के मामले में मुख्य अभियुक्तों में शामिल शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली की मुश्किलें फिर बढ़ सकती हैं। पुलिस की रिपोर्ट पर सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय ने उन्हें 3 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने का नोटिस जारी किया है। आरोप है कि जफर अली सोशल मीडिया पर राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से भड़काऊ और आपत्तिजनक बयान दे रहे थे, जिससे दो समुदायों के बीच शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार ने बताया कि संभल कोतवाली की ओर से 23 सितंबर को भेजी गई रिपोर्ट 25 सितंबर को उनके समक्ष पेश हुई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि जफर अली के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट से दो समुदायों के बीच शांति व्यवस्था बिगड़ सकती है। पुलिस ने पूर्व में भी उनके खिलाफ इस तरह की बयानबाजी से माहौल प्रभावित होने और मुकदमे दर्ज होने का उल्लेख किया है। नोटिस में जफर अली को 3 अक्टूबर को न्यायालय में उपस्थित होकर कारण बताने को कहा गया है कि छह महीने तक परिशांति बनाए रखने के लिए 20 हजार रुपये की जमानत या इसी धनराशि का स्वयंबंध पत्र क्यों न लिया जाए। हिंसा की साजिश में जेल जा चुके हैं जफर अली जफर अली को 24 मार्च 2025 को पुलिस ने संभल हिंसा की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद 1 अगस्त 2025 को वह मुरादाबाद जेल से रिहा हुए थे। करीब 131 दिन जेल में रहने के बाद बाहर आए जफर अली ने 24 जुलाई 2026 को असदुद्दीन ओवैसी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली थी। उन्होंने संभल से चुनाव लड़ने का ऐलान भी किया था।
सर्वे के दौरान भड़की थी हिंसा, पांच लोगों की मौत 19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट, चंदौसी में दाखिल किया गया था। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन पहले चरण का सर्वे हुआ। 24 नवंबर को दूसरे चरण के सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और हिंसा भड़क गई। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान पथराव और फायरिंग हुई, जिसमें पांच लोगों की मौत हुई थी। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, एएसपी अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। 2750 से ज्यादा लोगों पर मुकदमे, कई आरोपी जेल गए संभल कोतवाली और नखासा थाने में हिंसा के मामले में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गईं। इनमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल समेत कई लोगों को नामजद किया गया। पुलिस के मुताबिक 2750 से अधिक लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए। बाद में साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट से विधायक पुत्र का नाम निकाल दिया गया। मामले में तीन महिलाओं और फरार गैंगस्टर शारिक साठा के तीन कथित गुर्गों मुल्ला अफरोज, वारिस और गुलाम की गिरफ्तारी भी हुई। मुल्ला अफरोज पर अक्टूबर 2025 में रासुका लगाई गई थी, जबकि बाद में वारिस और गुलाम पर भी कार्रवाई हुई। शारिक साठा के खिलाफ रेड कॉर्नर लुकआउट नोटिस जारी हो चुका है। कई आरोपियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
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