गोंडा में 3 दिन से बिजली गुल:जेई बोले- मैं फोन नहीं उठाता हूं, ये लिख देना, मेरा नाम हो जाएगा, 10 लाख लोग परेशान
गोंडा में पिछले तीन दिनों से बिजली व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। आज सोमवार सुबह आठ बजे तक भी ग्रामीण क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई है जिले की लगभग 10 लाख की आबादी भीषण बिजली संकट और अंधेरे में जीने को विवश है। लगातार 80 घंटे से अधिक समय से आपूर्ति ठप रहने के कारण हाहाकार मचा हुआ है। घरों में पानी की किल्लत हो गई है और जरूरी घरेलू कामकाज ठप पड़े हैं। बिजली न होने से स्थिति विकराल रूप ले चुकी है। भीषण उमस और गर्मी के बीच कई परिवारों में लोग तीन दिन से स्नान तक नहीं कर पाए हैं। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। इस संकट का असर मूक पशुओं पर भी पड़ा है; जिले के कई गौ आश्रय केंद्रों में सबमर्सिबल पंप बंद होने के कारण गायों को पीने का स्वच्छ पानी तक नसीब नहीं हो पा रहा है। जेई की संवेदनहीनता आई सामने संकट की इस घड़ी में बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह लापरवाह बने हुए हैं। मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता,अधिशासी अभियंता से लेकर अवर अभियंता (जेई) अनिल मानस तक अपने सरकारी सीयूजी (CUG) नंबरों पर आने वाली कॉल रिसीव नहीं कर रहे हैं, जिससे उपभोक्ता अपनी शिकायत तक दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। विभागीय संवेदनहीनता की हद तब पार हो गई जब डुमरियाडीह विद्युत उपकेंद्र के परेशान उपभोक्ताओं ने जेई अनिल मानस को सीयूजी नंबर पर कई बार फोन किया। फोन उठाने पर जब उपभोक्ताओं ने बिजली बहाली को लेकर सवाल किया, तो जेई ने गैर-जिम्मेदाराना अंदाज में कहा कि "सुबह देखा जाएगा।" वहीं जब उपभोक्ता ने बार-बार सरकारी फोन न उठाने पर नाराजगी जताई, तो जेई ने तंज कसते हुए कहा— "इसे भी आप छाप दीजिएगा कि मैं फोन नहीं उठाता हूं, थोड़ा बहुत हमारा नाम हो जाएगा।" जेई का यह गैर-जिम्मेदाराना बयान बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मामले को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है और लापरवाह कर्मचारियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। इस पूरे प्रकरण पर देवीपाटन मंडल के मुख्य अभियंता ने संज्ञान लेते हुए मामले की जांच कराने और जल्द विद्युत आपूर्ति बहाल करने का आश्वासन दिया है। वहीं शहर क्षेत्र की अगर बिजली सप्लाई की बात करें तो 80% बिजली आपूर्ति शहर की बहस हो गई है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की अभी बिजली आपूर्ति पूरी तरीके से बाहर नहीं हो पाई है अभी भी 70% आबादी ग्रामीण क्षेत्र की प्रभावित है।
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