श्रावस्ती में राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर:इकौना-जमुनहा के दर्जनों गांव प्रभावित, रास्ते जलमग्न फसल-मकानों को नुकसान; अब तक दो की मौत
श्रावस्ती में लगातार चार दिनों की बारिश के बाद राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से जिले में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। रविवार रात करीब दो बजे तक नदी का जलस्तर 128.750 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान से करीब 1 मीटर ऊपर है। जलस्तर बढ़ने से जमुनहा और इकौना तहसील के तटवर्ती क्षेत्रों के करीब एक दर्जन गांव प्रभावित हुए हैं। कई गांवों को जोड़ने वाले मुख्य मार्गों पर पानी भर गया है। इकौना तहसील के नारायणपुर सहित राप्ती किनारे के कई अन्य गांवों में जलभराव की स्थिति बनी है। भिनगा क्षेत्र में पुल पर पानी चलने से लोगों को पानी के बीच से आवागमन करना पड़ा। गिलौला सीएचसी परिसर में भी राप्ती का पानी भर गया है।
पानी के तेज बहाव के कारण मल्हीपुर क्षेत्र में बीती रात्रि मल्हीपुर-भिनगा मार्ग पर कटान शुरू हो गया। प्रशासन ने तत्काल बचाव कार्य शुरू कराया। कटान वाले स्थान पर पानी के बहाव को रोकने के लिए ईंटों से भरी बोरियां लगाई गई हैं और टीम मौके पर निगरानी कर रही है। संभावित बाढ़ को देखते हुए जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग और पुलिस अधीक्षक राहुल भाटी ने इकौना के नारायणपुर समेत जमुनहा तहसील के प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने राहत एवं बचाव की तैयारियों का जायजा लेकर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं।
अतिवृष्टि और तेज हवाओं से जिले में धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन के प्रारंभिक सर्वे में 87 हेक्टेयर धान की फसल, 22 कच्चे मकान, दो पक्के मकान और 11 पशुशेड क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाकर आवागमन बहाल कराया गया है। रविवार को दिनभर धूप निकलने के बाद सोमवार सुबह भी मौसम साफ रहा। इससे लोगों को राप्ती का जलस्तर घटने की उम्मीद है। हालांकि जलस्तर दोबारा बढ़ने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। प्रशासन ने बाढ़ चौकियों, शरणालयों और राहत-बचाव टीमों को सक्रिय रखा है। जिला आपदा नियंत्रण कक्ष 24 घंटे संचालित है। आपात स्थिति में 1077, 7905573303, 7991990387, 9721939303 और 05250-297302 पर सूचना दी जा सकती है।
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