सपा-भाजपा-AIMIM नेताओं की भड़काऊ बयानबाजी से शांतिभंग का खतरा:नोटिस भेजकर 3 अक्टूबर को कोर्ट बुलाया, पूछा- छह महीने और ₹20,000 से पाबंद क्यों न करें
संभल में सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयानबाजी को लेकर पुलिस की रिपोर्ट पर सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय ने सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता ममलूकुर्रहमान बर्क, भाजपा के पश्चिम क्षेत्र के पूर्व क्षेत्रीय उपाध्यक्ष/पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश सिंघल और AIMIM नेता शकील अहमद को नोटिस जारी किया है। तीनों को 3 अक्टूबर को न्यायालय में उपस्थित होकर जवाब देने के लिए कहा गया है। सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार के मुताबिक, संभल कोतवाली और नखासा थाने की पुलिस की ओर से 23 सितंबर को रिपोर्ट भेजी गई थी। यह रिपोर्ट 25 सितंबर को उनके समक्ष प्रस्तुत की गई। पुलिस रिपोर्ट में सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों के जरिए दो समुदायों के बीच शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। 6 महीने तक शांति बनाए रखने को लेकर मांगा जवाब पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर जारी नोटिस में संबंधित लोगों से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि छह महीने तक परिशांति बनाए रखने के लिए 20 हजार रुपये की जमानत या इसी धनराशि का स्वबंध पत्र क्यों न लिया जाए। ममलूकुर्रहमान बर्क, राजेश सिंघल और शकील अहमद के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट में अलग-अलग धाराओं के तहत कार्रवाई की संस्तुति की गई है। राजेश सिंघल के बयान के बाद गरमाया मामला मामला उस समय चर्चा में आया, जब रहटौल गांव में रामलीला कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता राजेश सिंघल ने संभल के हरिहर मंदिर और शाही जामा मस्जिद को लेकर बयान दिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि संभल में अब मस्जिद नहीं, मंदिर बनेंगे और मंदिर निर्माण के दौरान गोली के बजाय पुष्पवर्षा होगी। इस बयान के बाद ममलूकुर्रहमान बर्क और AIMIM नेताओं की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसके बाद पुलिस-प्रशासन ने बयानबाजी और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर कार्रवाई शुरू की। जफर अली को भी पहले जारी हो चुका है नोटिस इससे पहले शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष जफर अली को भी सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से नोटिस जारी किया गया था। उन्हें 3 अक्टूबर को न्यायालय में उपस्थित होकर यह बताने के लिए कहा गया है कि छह महीने तक शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 20 हजार रुपये की जमानत या स्वबंध पत्र क्यों न लिया जाए। पुलिस की रिपोर्ट में जफर अली के सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों का उल्लेख करते हुए शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब 3 अक्टूबर को न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)