यूपी में 48 घंटे में 56 मौतें! बारिश ने मचाई भारी तबाही
उत्तर प्रदेश में मानसून के अंतिम दौर में हुई भारी बारिश ने 48 घंटे के भीतर बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बारिश और तूफान से जुड़ी घटनाओं में 56 लोगों की मौत और 46 लोगों के घायल होने की सूचना है। 1,020 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और 56 जिले प्रभावित बताए गए हैं। वहीं, ओडिशा और उत्तराखंड में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
दि राइजिंग न्यूज़ | उत्तर प्रदेश | 28 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश में मानसून के अंतिम दौर में हुई अत्यधिक बारिश ने व्यापक तबाही मचाई है। 25 सितंबर की सुबह से 27 सितंबर की सुबह तक राज्य में सामान्य से कई गुना अधिक बारिश दर्ज की गई। बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं में 56 लोगों की मौत हुई है, जबकि 46 लोग घायल बताए गए हैं। ओडिशा और उत्तराखंड में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ और सुरक्षा संबंधी खतरा बढ़ गया है।
उत्तर प्रदेश में 48 घंटे की बारिश ने मचाई तबाही
उत्तर प्रदेश में मानसून के अंतिम दौर में बारिश ने कई जिलों में गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार, 25 सितंबर की सुबह से 27 सितंबर की सुबह के बीच राज्य में 97.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस अवधि में सामान्य बारिश का औसत करीब 4.5 मिलीमीटर बताया गया है। यानी थोड़े समय में सामान्य से कई गुना अधिक बारिश हुई।भारी बारिश और तूफान से जुड़ी घटनाओं में प्रदेश में 56 लोगों की मौत हुई है, जबकि 46 लोग घायल हुए हैं। राहत आयुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोद के अनुसार, बारिश और संबंधित आपदा से 1,020 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा 107 मवेशियों की भी मौत हुई है। प्रदेश के 75 में से 56 जिले अत्यधिक बारिश से प्रभावित बताए गए हैं।
इन जिलों में सामान्य से हजारों प्रतिशत अधिक बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश ने सामान्य आंकड़ों को काफी पीछे छोड़ दिया। फर्रूखाबाद में सामान्य से 7,385 प्रतिशत अधिक, कन्नौज में 5,664 प्रतिशत अधिक और शाहजहांपुर में 4,408 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। हमीरपुर और महोबा में भी सामान्य से क्रमशः 4,240 और 4,100 प्रतिशत अधिक बारिश हुई।लगातार और अत्यधिक बारिश का सीधा असर ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी क्षेत्रों पर पड़ा। सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी और बहराइच जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में मकानों को नुकसान पहुंचा। कई जगह मिट्टी के घर, पुरानी ईंटों की संरचनाएं और चारदीवारी लगातार बारिश के दबाव में ढह गईं। जल निकासी की व्यवस्था पर भी अत्यधिक दबाव पड़ा।
आखिर इतनी विनाशकारी बारिश क्यों हुई
इस बार उत्तर प्रदेश में बारिश की स्थिति को प्रभावित करने वाली एक प्रमुख वजह एक साथ सक्रिय हुईं दो अलग-अलग मौसम प्रणालियां बताई जा रही हैं। बंगाल की खाड़ी से बना गहरा निम्न दबाव क्षेत्र नमी लेकर उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ा। इसी दौरान पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय था। दोनों प्रणालियों के प्रभाव से मध्य उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्र में भारी बारिश हुई।कम समय में अत्यधिक बारिश होने के कारण कई इलाकों की जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया। लगातार 20 से 24 घंटे तक हुई बारिश ने मिट्टी के मकानों और पुरानी संरचनाओं को कमजोर कर दिया। कई स्थानों पर अचानक मकान और दीवारें गिरने से लोगों की जान गई। ग्रामीण इलाकों में इसका असर अधिक दिखाई दिया।
तेज हवाओं और आकाशीय बिजली ने बढ़ाई परेशानी
भारी बारिश के साथ कई इलाकों में तेज हवाएं भी चलीं। कुछ स्थानों पर हवाओं की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंची। इसके अलावा आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं ने भी खतरा बढ़ाया। पेड़ों के गिरने और बिजली के खंभों के क्षतिग्रस्त होने से कई क्षेत्रों में लोगों और मवेशियों के लिए खतरा पैदा हुआ।खुले इलाकों में काम कर रहे ग्रामीणों और मजदूरों को सबसे अधिक जोखिम का सामना करना पड़ा। बारिश के कारण कमजोर हुई संरचनाओं के गिरने, पेड़ों के उखड़ने और बिजली के तारों से दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य किए जा रहे हैं। मौसम में सुधार के साथ स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जताई गई है।
क्या जलवायु परिवर्तन भी एक वजह है
सितंबर के अंतिम दिनों में आमतौर पर मानसून की वापसी शुरू होने लगती है, लेकिन हाल के वर्षों में मौसम के तौर-तरीकों में बदलाव देखने को मिला है। बंगाल की खाड़ी का समुद्री तापमान लंबे समय तक अधिक रहने पर वहां देर से भी मजबूत निम्न दबाव क्षेत्र बन सकते हैं। इससे मानसून की वापसी के दौरान भी भारी बारिश की परिस्थितियां बन सकती हैं।कम समय में बहुत अधिक बारिश होने की घटनाएं जल निकासी, खेती, मकानों और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के लिए बड़ी चुनौती बन जाती हैं। हालांकि किसी एक बारिश की घटना को केवल जलवायु परिवर्तन के कारण बताना उचित नहीं होगा। मौसम प्रणालियों की स्थिति, समुद्र का तापमान और स्थानीय परिस्थितियां मिलकर बारिश की तीव्रता को प्रभावित करती हैं।
ओडिशा में भी बढ़ा बाढ़ का खतरा
उत्तर और मध्य भारत में भारी बारिश के बीच ओडिशा में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने की स्थिति सामने आई है। महानदी नदी प्रणाली में पानी का बहाव तेजी से बढ़ रहा है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ दिलीप कुमार राउत के अनुसार, मुंडली के पास महानदी का जलप्रवाह करीब 8 लाख घन फुट प्रति सेकंड तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।खुर्दा, कटक, पुरी और जगतसिंहपुर के निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। लूना, करंडिया, चित्रोत्पला, काठाजोड़ी, कुआखाई, बैतरणी, सालंदी और सुवर्णरेखा नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
उत्तराखंड में गंगा का जलस्तर बढ़ा
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के बाद गंगा नदी का जलस्तर भी बढ़ा है। ऋषिकेश के पास मुनि की रेती क्षेत्र में सुरक्षा को देखते हुए गंगा में नदी पर्यटन और राफ्टिंग गतिविधियों को फिलहाल रोक दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इसे मौसम और नदी के जलस्तर में सुधार आने के बाद ही दोबारा शुरू किया जाएगा।लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में नदी-नालों के जलस्तर में अचानक वृद्धि का खतरा बना रहता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी रख रही हैं। पर्यटकों और स्थानीय लोगों से भी नदी के आसपास सावधानी बरतने की अपील की जाती है। मौसम में सुधार के बाद ही सामान्य गतिविधियां बहाल होने की उम्मीद है।
मौसम में अब सुधार के संकेत
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 48 घंटे की अत्यधिक बारिश के बाद मौसम की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ है। हालांकि बारिश का प्रभाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और तराई क्षेत्रों में मौसम सक्रिय बना हुआ है। प्रभावित जिलों में जलभराव और क्षतिग्रस्त मकानों के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित है।प्रशासन के सामने अब प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने, क्षतिग्रस्त मकानों का आकलन करने और जलभराव वाले इलाकों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ ओडिशा और उत्तराखंड में भी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मुख्य बिंदु
- उत्तर प्रदेश में 48 घंटे के दौरान अत्यधिक बारिश।
- बारिश और संबंधित घटनाओं में 56 लोगों की मौत।
- 46 लोग घायल और 1,020 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त।
- 56 जिलों में अत्यधिक बारिश का प्रभाव।
- कई जिलों में सामान्य से हजारों प्रतिशत अधिक बारिश।
- ओडिशा में महानदी समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा।
- उत्तराखंड में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद राफ्टिंग रोकी गई।
- मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश में अब सुधार के संकेत।
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