जालौन में बारिश से 30 हजार-हेक्टेयर से ज्यादा धान प्रभावित:खेतों में भरा पानी, पकने से पहले फसल चौपट होने का डर; 2 कच्चे मकान भी गिरे
जालौन जिले में पिछले करीब 48 घंटे से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में पानी भरने से धान और बाजरा समेत खरीफ की फसलें जलमग्न हो गई हैं। किसानों के अनुसार जिले में 30 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बोई गई धान की फसल बारिश से प्रभावित हुई है। सबसे ज्यादा परेशानी उन किसानों को है, जिनकी धान की फसल अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी और बालियां पकने की अवस्था में थीं। खेतों में लगातार पानी भरा रहने से फसल के सड़ने और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। किसान अब मौसम साफ होने और खेतों से पानी निकलने का इंतजार कर रहे हैं। भेंपता गांव में धान की फसल में 90% नुकसान का दावा कोंच तहसील क्षेत्र के ग्राम भेंपता के किसानों ने बारिश से हुए नुकसान की तस्वीर सामने रखी। किसान रमाकांत पटेल ने बताया कि उनकी धान की फसल में बालियां आने की अवस्था थी। फसल तैयार करने में करीब 5 हजार रुपए प्रति बीघा तक लागत आ चुकी थी। उन्होंने बताया कि लगातार बारिश के कारण खेत पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। फिलहाल करीब 90 प्रतिशत तक नुकसान दिखाई दे रहा है। रमाकांत के मुताबिक मौसम साफ होने और पानी उतरने के बाद ही पता चल सकेगा कि कितनी फसल बची है। अगस्त में तिल-उड़द बर्बाद, अब धान पर भी संकट किसान संदीप त्रिपाठी ने बताया कि अगस्त में हुई लगातार बारिश से उनकी तिल और उड़द की फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी थी। इसके बाद मुश्किलों के बीच खाद की व्यवस्था कर धान की फसल तैयार की गई। संदीप के मुताबिक उनके पास करीब 12 एकड़ धान की फसल थी और अब तक प्रति बीघा करीब 5 से 6 हजार रुपए तक लागत लग चुकी थी। फसल अंतिम दौर में थी और करीब 15 दिन में बालियां पूरी तरह पकने की उम्मीद थी, लेकिन लगातार बारिश से खेत पानी में डूब गए हैं। उनका कहना है कि अब फसल में कुछ बचने की उम्मीद कम है। गांव के 80% किसानों की फसल प्रभावित किसान विशाल सिंह ने बताया कि भेंपता गांव में करीब 80 प्रतिशत किसानों की फसल बारिश से प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि उनकी तिल की फसल पहले ही पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी और अब धान में भी करीब 90 प्रतिशत नुकसान दिखाई दे रहा है। किसानों के मुताबिक खाद की किल्लत के बीच किसी तरह खाद की व्यवस्था कर फसल तैयार की गई थी। उन्हें उम्मीद थी कि धान की फसल से पहले हुए नुकसान की भरपाई हो जाएगी, लेकिन कटाई से ठीक पहले बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पहले खराब फसल का मुआवजा नहीं मिला, अब धान भी संकट में किसानों का कहना है कि अगस्त में बारिश से खराब हुई तिल, उड़द और अन्य खरीफ फसलों का अभी तक मुआवजा नहीं मिल सका है। कई किसानों ने खेती बटाई पर ले रखी थी। ऐसे में फसल खराब होने से उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि पहले की फसल खराब होने के बाद उन्होंने धान से नुकसान की भरपाई की उम्मीद लगाई थी, लेकिन लगातार बारिश ने धान की फसल को भी संकट में डाल दिया। रबी की बुवाई पर भी पड़ सकता है असर लगातार बारिश से रबी की फसल की तैयारियों पर भी असर पड़ने की आशंका है। किसानों ने बताया कि जिन खेतों में पहले तिल की फसल खराब हुई थी, वहां पानी की निकासी पूरी तरह नहीं हो सकी थी। किसानों को उम्मीद थी कि अक्टूबर के पहले सप्ताह तक खेतों से पानी निकल जाएगा और वे मटर समेत अन्य रबी फसलों की बुवाई शुरू कर देंगे। लेकिन दोबारा हुई लगातार बारिश से खेत फिर पानी में डूब गए हैं। इससे रबी की बुवाई में देरी होने के साथ खेती की लागत बढ़ने की आशंका है। किसानों ने सर्वे और मुआवजे की मांग की किसानों ने प्रशासन से तत्काल खेतों का सर्वे कराने, जल निकासी की व्यवस्था करने और फसल नुकसान के आधार पर मुआवजा दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि मौसम इसी तरह बना रहा और खेतों में पानी लंबे समय तक जमा रहा तो बची हुई फसल भी पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। डीएम बोले- मौसम साफ होते ही कराया जाएगा सर्वे जिलाधिकारी समीर ने कहा कि मौसम सही होने के बाद राजस्व विभाग की टीमों को तत्काल खेतों का सर्वे कराने के निर्देश दिए जाएंगे। जिन किसानों की फसल बारिश से प्रभावित हुई है, उन्हें शासन के नियमानुसार क्षतिपूर्ति दिलाने की कार्रवाई की जाएगी। बारिश से दो कच्चे मकान भी गिरे जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते उरई तहसील के डकोर ब्लॉक और विकासखंड जालौन के ग्राम कुठौंदा बुजुर्ग में दो कच्चे मकान भरभराकर गिर गए। दोनों घटनाओं में परिवार के सदस्यों ने समय रहते बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। डकोर में मकान गिरा, अंदर बंधे थे मवेशी डकोर ब्लॉक क्षेत्र में रामजीवन का कच्चा मकान लगातार बारिश के बीच अचानक गिर गया। रामजीवन के मुताबिक घटना के समय परिवार के सदस्य घर में खाना बना रहे थे। मकान में चार बकरियां और एक गाय का पड़ेरू भी बंधा था। कुठौंदा बुजुर्ग में गृहस्थी का सामान मलबे में दबा वहीं विकासखंड जालौन के ग्राम कुठौंदा बुजुर्ग निवासी जवान सिंह का कच्चा मकान भी लगातार बारिश और जलभराव के कारण ढह गया। मकान गिरने से गृहस्थी का सामान, अनाज और जरूरी दस्तावेज मलबे में दबकर खराब हो गए। गनीमत रही कि हादसे के समय परिवार के सदस्य मकान के अंदर नहीं थे। इससे जनहानि नहीं हुई। मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। दोनों परिवारों ने प्रशासन से जल्द राहत और आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की है।
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