जलमग्न खेतों से धान निकालने को मजबूर किसान:कंबाइन नहीं पहुंचने पर घर लाकर किराए की मशीन से कर रहे थ्रेसिंग, 75% तक नुकसान
रामपुर में खेतों में पानी भरने के कारण धान की फसल की थ्रेसिंग के लिए कंबाइन मशीन खेतों तक नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में किसान जलमग्न खेतों से किसी तरह कटी धान की फसल निकालकर ट्रैक्टर-ट्रॉली से घर ला रहे हैं। इसके बाद घर के सामने किराए की कंबाइन मशीन लगाकर धान की थ्रेसिंग करा रहे हैं। सोमवार सुबह करीब 9 बजे बकेरियां गांव में किसानों की यह जद्दोजहद देखने को मिली। किसान दलपत ने बताया कि खेत में पानी भरा होने के कारण कंबाइन मशीन वहां तक नहीं पहुंच सकती। बची हुई धान की फसल को निकालने के लिए पहले पानी से भरे खेत में उतरकर फसल जुटाई। कुछ दूरी तक धान को हाथों से और कुछ दूरी तक सिर पर रखकर ट्रैक्टर-ट्रॉली तक पहुंचाया। इसके बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली से फसल घर लाई गई। यहां करीब 5 हजार रुपये किराए पर कंबाइन मशीन मंगाकर धान की थ्रेसिंग कराई जा रही है।
75 फीसदी तक फसल खराब दलपत ने बताया कि इस बार धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। लंबे समय तक पानी में रहने से धान की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। थ्रेसिंग के दौरान धान टूटने की समस्या भी आ रही है। उन्होंने बताया कि उनकी करीब 75 फीसदी फसल खराब हो गई है। किसान डालचंद ने बताया कि कई किसानों की फसल में 75 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है, जबकि कुछ किसानों की पूरी फसल खराब हो गई है।
किसानों का कहना है कि खेतों में पानी भरा होने के कारण कंबाइन मशीन पहुंचाना संभव नहीं है। बची हुई फसल को बचाने के लिए भी अतिरिक्त मेहनत और खर्च करना पड़ रहा है। किसान पानी से भरे खेतों से फसल निकालकर घर ला रहे हैं और वहीं थ्रेसिंग करा रहे हैं।
डीएम ने सर्वे के दिए निर्देश उधर, डीएम ने रविवार सुबह करीब 10 बजे राजस्व विभाग के अधिकारियों को धान की फसल के नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए। एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, लेखपाल और कानूनगो समेत अन्य अधिकारियों को क्षेत्र में जाकर फसल का सर्वे करने और जल्द रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। अधिकारियों से सर्वे के आधार पर पात्र किसानों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
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