कारोबारी की बहू आज जेल से रिहा हो सकती है:क्लोजर रिपोर्ट पर कोर्ट में सुनवाई, बेटे ने पिता की हत्या कराकर बीवी को फंसाया था

Sep 28, 2026 - 08:24
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कारोबारी की बहू आज जेल से रिहा हो सकती है:क्लोजर रिपोर्ट पर कोर्ट में सुनवाई, बेटे ने पिता की हत्या कराकर बीवी को फंसाया था
दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में जेल भेजी गई बहू शालू की रिहाई का रास्ता फिलहाल साफ हो गया है। पुलिस ने विवेचना में शालू की भूमिका नहीं मिलने पर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। अगर सबकुछ सामान्य रहा तो कोर्ट से आज शालू रिहा हो सकती है। इसके बाद शालू जेल से बाहर आ जाएगी। शालू की रिहाई को लेकर भाई धीरज अरोड़ा का कहना है कि पुलिस ने जब उसको हत्याकांड में आरोपी बनाकर जेल भेजा था, तभी से उन्हें भरोसा था कि वह ऐसा नहीं कर सकती। अब खुशी है कि जिस पुलिस ने उसे जेल भेजा था, उसी ने विवेचना के बाद उसे हत्याकांड में निर्दोष मानते हुए कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। भाई ने बताया कि शालू का बेटा श्रीजय फिलहाल लखनऊ में उनके पास रह रहा है। जेल से रिहा होने के बाद शालू कानपुर में रतन आर्बिट स्थित अपनी ससुराल वाले फ्लैट पर न जाकर सीधे लखनऊ में मायके आएगी और बेटे से मिलेगी। 5 सितंबर को दवा कारोबारी की हत्या हुई थी इंदिरा नगर रतन ऑर्बिट के फ्लैट C-104 निवासी दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की 5 सितंबर को 17 चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। बीते गुरुवार को पुलिस ने बेटे सुब्रत मिनोचा को अरेस्ट कर जेल भेजा था। पुलिस की जांच में जो खुलासे हुए वो चौंकाने वाले थे। हत्यारोपी बेटे सुब्रत ने मीडिया से मुखातिब होते हुए अपने गुनाह को कबूल किया था। उसने कहा था कि पिता अय्याश किस्म के थे, उनके कई महिलाओं से संबंध थे। जिसकी वजह से उसकी मां पुनीता मिनोचा उनके साथ नहीं रहती थीं। उसे डर था कि ऐसे में कोई महिला उसके घर न आ जाए जो दावा कर दे कि वह विनीत के बच्चे की मां बनने वाली है। सुब्रत ने कबूल किया था कि उसने अपने पुराने नौकर विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर के जरिए अपने पिता की हत्या कराई थी। बेटे सुब्रत ने कहा कि मैंने विशाल को बोला था कि अगर पकड़ जाना तो शालू का नाम ले लेना। विशाल के पहले दिन के बयान, दोनों के बीच वॉट्सऐप चैट, वाइस कॉल की डिटेल, सिक्योरिटी गार्ड मदन सिंह के बयान, जिसमें उसने बताया कि शालू ने विशाल का नाम शुभम और उसकी एंट्री रजिस्टर में न करने को बताया था। शुरुआती जांच में शालू को हत्यारोपी मानते हुए पुलिस ने उसे जेल भेजा था। इसके बाद से वह जेल में बंद है। 24 सिंतबर को सुब्रत ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था। इसके बाद पुलिस ने उसे जेल भेजा था। पुलिस की जांच में शालू निर्दोष साबित हुई थी, जिसके बाद शुक्रवार को पुलिस ने शालू के पक्ष में क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। इस पर आज सोमवार को सुनवाई होगी। पत्नी के खिलाफ सबूत जुटाने के लिए क्या चाल चली? DCP वेस्ट एसएम कासिम आबिदी कहते हैं- सुब्रत अपने पिता विनीत मिनोचा से नफरत तो लंबे समय से करता था। लेकिन, उन्हें मारने की प्लानिंग वो पिछले 1-2 महीने से करने लगा था। वो जानता था कि पापा को रास्ते से हटाने के बाद उनके भाई यानी कि सुब्रत के चाचा पुनीत उसके पीछे आएंगे। भाई की मौत की सच्चाई जानने की पूरी कोशिश करेंगे। हो सकता है, प्रॉपर्टी को लेकर भी झगड़ा पैदा हो जाए। इसलिए वह चाहता था कि एक तीर से दो निशाने लगे। पापा की हत्या और चाचा को कातिल बना दिया जाए। उसने अपना यही प्लान विशाल से बताया। विशाल सुब्रत की दुकान में नौकरी करता था, जिसे 7 महीने पहले विनीत ने निकाल दिया था। प्लान करते वक्त दोनों यह भी जानते थे कि पुनीत की शहर में अच्छी पकड़ है। वह खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए सारे जतन करेगा। इसलिए करीब 25 दिन पहले साजिश में बदलाव किया गया। सुब्रत ने अब अपनी ही पत्नी को साजिश के मास्टरमाइंड की तरह पेश करने का फैसला किया। सबूत क्रिएट करने के लिए हत्या से करीब 20 दिन पहले पत्नी शालू को लेकर परेड चौराहा पहुंचा। यहां उसको विशाल मिला। तीनों कार में एक साथ बड़ा चौराहा स्थित जेड स्क्वायर मॉल में शॉपिंग करने गए। सुब्रत खुद कार में बैठा रहा, जबकि शालू और विशाल को मॉल से शॉपिंग करने भेज दिया। जिससे लोगों के सामने विशाल शालू के साथ दिखे। पुलिस जब बाद में मोबाइल लोकेशन देखे, तब विशाल के साथ शालू की लोकेशन सामने आए। फिर सुब्रत दोनों को 80 फीट रोड के बनारसी टी स्टॉल पर लेकर पहुंचा। यहां जूही परमपुरवा के लारेब की दुकान से एक ताले की डुप्लिकेट चाबी भी बनवाई। इसके 100 रुपए सुब्रत ने विशाल के जरिए दिलवाए। सुब्रत, विशाल का इलाज कराने डॉक्टर के पास गया। बाकी की दोनों लोकेशन पर पत्नी को साथ रखा, खुद कार में ही बैठा रहा। पब्लिक के सामने विशाल और शालू को ही भेजा। हत्या की रात- विनीत ने विशाल को चोर समझा, फिर बदलना पड़ा प्लान फिर आई 5 सितंबर की रात, जब सुब्रत ने अपने पिता को मारने की प्लानिंग की थी। कत्ल से पहले शाम 6 से लेकर 8 बजे के बीच सुब्रत ने विशाल को 4 बार फोन किया। विशाल जानता था कि अकेले वो ये काम नहीं कर सकता था। इसलिए उसने अपने दोस्त राज किशोर को भी शामिल कर लिया। जैसा कि पहले से तय था, सुब्रत रात 9:30 बजे अपनी पत्नी शालू को लेकर पार्टी के लिए घर से निकल गया। जाने से पहले उसने अपार्टमेंट के CCTV बंद कर दिए। रात 9:45 बजे विशाल और राजकिशोर असली चाबी से फ्लैट के अंदर दाखिल हुए, जो सुब्रत पहले ही विशाल को दे चुका था। प्लान था कि हर रोज करीब 10 बजे तक कारोबारी विनीत सो जाते थे। सुब्रत ने विशाल और राजकिशोर से कहा था कि विनीत का मुंह तकिए से दबाकर दम घोंट देना। कमरे में कोई उथल-पुथल नहीं होनी चाहिए। जिससे सुबह सबको लगे कि उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई है। राजकिशोर और विशाल कारोबारी के कमरे में पहुंचकर छिप गए। रात 11:30 बजे तक इंतजार किया। कारोबारी को नींद नहीं आ रही थी। वह देर से कमरे में आए। जैसे ही लाइट जलाई, उनकी नजर विशाल पर पड़ी। वह चोर समझकर चिल्लाए- बचाओ चोर… बचाओ। विशाल घबरा गया। वह अपने साथ चाकू लेकर आया था। उसी से उसने विनीत पर हमला कर दिया। एक-एक करके 17 वार किए। फिर तेजी से राजकिशोर के साथ फ्लैट से निकल गया। यही वो बड़ी चूक हो गई, जिससे पुलिस विशाल तक सिर्फ 14 घंटे में पहुंच गई। दरअसल, अपार्टमेंट के बाहर लगे CCTV में दोनों नजर आ गए। इस सिचुएशन के लिए सुब्रत पहले से तैयार था। उसके प्लान के तहत ही विशाल ने पुलिस के सामने शालू का नाम लिया। सुब्रत ने चालाकी से शालू के मोबाइल से विशाल को फोन करवाए थे। कानपुर पुलिस ने भी बिना गहराई से जांच किए 24 घंटे के अंदर शालू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। चाचा बोले- मैं खुद हैरान हूं, भतीजा क्यों फंसाना चाह रहा था जब मामले में खुलासे को लेकर लगातार सवाल उठे, तो कस्टडी रिमांड के दौरान सुब्रत और विशाल का सामना कराया गया। दोनों की बातचीत में इतने विरोधाभास मिले कि पुलिस को यह समझने में वक्त नहीं लगा कि ये दोनों कुछ छिपा रहे हैं। बंद कमरे में हुई पूछताछ में सुब्रत टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। सुब्रत ने पुलिस को बताया कि वह हत्या का आरोप अपने चाचा पुनीत मिनोचा पर डालना चाहता था, लेकिन उन्हें फंसाने की कोई ठोस वजह नहीं मिली। इसके बाद उसने अपनी पत्नी शालू पर आरोप लगवा दिए। दैनिक भास्कर ने चाचा पुनीत मिनोचा से बात की। वह कहते हैं- मैं पिछले 37 साल से अपने बड़े भाई विनीत मिनोचा से अलग रह रहा हूं। मेरा मकान नवाबगंज के सिग्नेचर सिटी में है। मैं कंस्ट्रक्शन का कारोबार करता हूं। मैं खुद भी हैरान हूं कि सुब्रत मुझे क्यों फंसाना चाहता था? हमारी तो मुलाकातें भी कम होती थीं। कभी बहस तक नहीं हुई, झगड़ा तो दूर की बात है। बेटा बोला- अच्छा हुआ गिरफ्तार हुआ, नहीं तो आत्महत्या कर लेता 24 सितंबर को सुब्रत गिरफ्तार किया गया। उसने कहा- मुझे पिता की हत्या कराने का कोई अफसोस नहीं है, वो अय्याश थे। मुझे केवल इतना पछतावा है कि उन्हें इस तरह चाकू से गोदकर नहीं मारना चाहिए था। मैं ऐसी हत्या नहीं कराना चाहता था। शालू जेल गई तो मुझे गिल्ट हुआ, मैं नींद की गोलियां खाने लगा था। अगर पुलिस मुझे न पकड़ती तो मैं आत्महत्या कर लेता। सुब्रत ने आगे कहा- पापा के कई महिलाओं से अफेयर थे। मुझे डर था कि वे किसी से शादी करके घर न ले आएं। वह संपत्ति में हिस्सेदार बन जाएगी। मैं एक-एक रुपए के लिए मोहताज था, जबकि पापा गोवा में लड़कियों के साथ पार्टी की तस्वीरें दिखाते थे। मुझ पर करीब 40 लाख रुपए का कर्ज था। पापा मुझे सिर्फ 40 हजार रुपए की पॉकेट मनी देते थे। मेरे साथ नौकरों जैसा व्यवहार करते थे। ---------------------------- ये खबर भी पढ़िए कानपुर में शव देख पत्नी बेसुध हुई, बेटी लिपटकर रोई: अपार्टमेंट में चाचा-भतीजे की मौत हुई थी, 5 घंटे हंगामे के बाद मालिक ने शर्तें मानीं कानपुर में शनिवार को बालाजी अपार्टमेंट में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से चाचा-भतीजे की मौत हो गई थी। रविवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद सुबह लगभग 7 बजे शव घर पहुंचा तो उनके परिवार वालों और रिश्तेदारों का आक्रोश फूट पड़ा। पढ़ें पूरी खबर…

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