मेरठ की लोक कलाओं को बाजार दे रहीं शिप्रा:12 साल में 5 हजार से ज्यादा बच्चियों को दी मुफ्त ट्रेनिंग, UPITS में दिखे अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक आर्ट

Sep 27, 2026 - 06:52
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मेरठ की लोक कलाओं को बाजार दे रहीं शिप्रा:12 साल में 5 हजार से ज्यादा बच्चियों को दी मुफ्त ट्रेनिंग, UPITS में दिखे अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक आर्ट
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में देशभर के उत्पादों के साथ विलुप्त होती लोक कलाओं को भी मंच मिला है। मेरठ की श्रुतकीर्ति आर्ट्स की शिप्रा शर्मा अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक चित्रकलाओं को नए रूप में तैयार कर लोगों तक पहुंचा रही हैं। उनके स्टॉल पर MDF, मिरर, स्टोन वर्क और फैब्रिक कलर से तैयार किए गए आर्ट पीस लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। शिप्रा ने बताया कि वह पिछले 12 साल से लोक कलाओं पर काम कर रही हैं। उनका उद्देश्य उन पारंपरिक कलाओं को आगे बढ़ाना है, जिन्हें नई पीढ़ी धीरे-धीरे भूलती जा रही है। उनके पास अलग-अलग राज्यों की करीब 10 तरह की पेंटिंग और आर्ट फॉर्म हैं। इन्हें आधुनिक जरूरतों के मुताबिक तैयार कर बाजार तक पहुंचाया जा रहा है। 5 हजार से ज्यादा बच्चियों को दी मुफ्त ट्रेनिंग शिप्रा के मुताबिक, कला को रोजगार से जोड़ने के साथ वह महिलाओं और बच्चियों को प्रशिक्षण भी दे रही हैं। अब तक 5 हजार से ज्यादा बच्चियों को निशुल्क ट्रेनिंग दी जा चुकी है। खास तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं और बच्चियों को प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे अपनी कला के जरिए आय का साधन बना सकें। 2-3 दिन में तैयार होता है छोटा आर्ट पीस आर्ट पीस तैयार करने में MDF, मिरर, स्टोन वर्क और फैब्रिक कलर का इस्तेमाल किया जाता है। शिप्रा ने बताया कि एक छोटे आर्ट पीस को तैयार करने में करीब दो से तीन दिन लगते हैं। वहीं डिजाइन और काम की बारीकी के हिसाब से बड़े पीस को तैयार करने में ज्यादा समय लगता है। 200 से 20 हजार रुपए तक कीमत स्टॉल पर मौजूद आर्ट पीस की कीमत 200 रुपए से शुरू होकर करीब 20 हजार रुपए तक है। शिप्रा का कहना है कि ट्रेड शो जैसे मंचों से पारंपरिक कला को नए ग्राहक मिल रहे हैं। इससे कलाकारों को अपनी कला को बाजार से जोड़ने और युवा पीढ़ी को इन कलाओं से परिचित कराने का अवसर मिल रहा है।

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