पितृपक्ष के दूसरे दिन गंगातट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़:पितरों की शांति के लिए किया तर्पण, गंगा स्नान और पूजा-अर्चना
उन्नाव में पितृपक्ष के दूसरे दिन सोमवार को भी गंगातट पर श्रद्धा और आस्था का संगम देखने को मिला। सुबह होते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों की शांति और मोक्ष की कामना लेकर गंगा घाटों पर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने कमर तक गंगा जल में खड़े होकर विधि-विधान से तर्पण किया। इसके बाद गंगा स्नान कर पूजा-अर्चना की। घाटों पर दिनभर वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई देती रही। पितृपक्ष के दौरान गंगातट पर पंडितों और महापात्रों ने श्रद्धालुओं को विधि-विधान से तर्पण कराया। श्रद्धालुओं ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार पंडों को दान-दक्षिणा भी दी। लोगों का मानना है कीपितृपक्ष में गंगातट पर स्नान और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। गीता पाठ का भी महत्व पंडित अजय तिवारी ने बताया कि पितृपक्ष में तर्पण के साथ धार्मिक ग्रंथों के पाठ काभी विशेष महत्व माना जाता है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के संदर्भ में बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते हुए पितरों में अर्यमा को अपना स्वरूप बताया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में गीता का पाठ करने से पितरों की शांति और मोक्ष की कामना की जाती है।
पहले दिन से ही पहुंच रहे श्रद्धालु रविवार को पितृपक्ष शुरू होते ही गंगातट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। लोगों ने अपने पितरों का तर्पण कर पंडितों को दान-दक्षिणा दी।दौरान कई लोगों ने पारिवारिक संबंधों में आई कटुता दूर करने की परंपरा भी निभाई। श्रद्धालुओं ने रूठे परिजनों को गंगा जल देकर मनाने का प्रयास किया, ताकि परिवार में मांगलिक कार्यों के दौरान किसी तरह की बाधा न आए। सोमवार को भी घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। महिलाएं और पुरुष गंगा स्नान के बाद तर्पण करते नजर आए। कई श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर पितरों को याद किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। घाटों पर बैठे पंडितों से श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से कर्मकांड कराया। पितृपक्ष के दूसरे दिन गंगातट पर उमड़ी भीड़ ने आस्था और परंपरा का अनूठा दृश्य प्रस्तुत किया। तर्पण, स्नान, पूजा और दान-दक्षिणा के माध्यम से लोगों ने अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी।
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