प्रयागराज में 2 लाख हेक्टेयर फसल हुई बर्बाद:खेतों में बिछी धान की पकी फसल, सोरांव, फूलपुर, होलागढ़ में सबसे ज्यादा नुकसान

Sep 27, 2026 - 09:54
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प्रयागराज में 2 लाख हेक्टेयर फसल हुई बर्बाद:खेतों में बिछी धान की पकी फसल, सोरांव, फूलपुर, होलागढ़ में सबसे ज्यादा नुकसान
प्रयागराज में सितंबर के आखिरी दिनों में जब खेतों में धान की फसल कटाई के लिए तैयार खड़ी थी, तभी लगातार तीन दिन की बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। तेज हवा से पक चुकी धान की फसल खेतों में गिर गई। इसके बाद बारिश का पानी बालियों में भरने से फसल के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। गंगापार और यमुनापार के कई इलाकों में करीब 20% फसल प्रभावित होने का अनुमान है। सोरांव, फूलपुर, होलागढ़, नवाबगंज समेत उन क्षेत्रों में नुकसान ज्यादा है, जहां धान की रोपाई पहले हो गई थी और फसल पककर तैयार थी। सोरांव-फूलपुर में सबसे ज्यादा नुकसान, हजारों बीघे फसल जमीन पर सोरांव, होलागढ़, नवाबगंज और फूलपुर क्षेत्र के कई गांवों में खेतों की तस्वीर एक जैसी है। तेज हवा के कारण पक चुकी धान की फसल जमीन पर बिछ गई है। कई हजार बीघे में फसल गिरने की बात किसान बता रहे हैं। खेतों में गिरी फसल पर बारिश का पानी जमा हो रहा है। किसानों को डर है कि समय पर फसल नहीं सूखी तो बालियां सड़ सकती हैं और पैदावार में भारी कमी आएगी। कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस चौहान के मुताबिक प्रयागराज में बासमती धान की रोपाई पहले हो जाती है। इस वजह से सितंबर में इसकी फसल पककर तैयार हो गई थी। लगातार बारिश के साथ तेज हवा चलने से तैयार फसल लुढ़क गई और उसमें पानी भर गया। इससे फसल के सड़ने का खतरा है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने धान की लेट ट्रांसप्लांटिंग की थी, उनकी फसल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई है, इसलिए वहां नुकसान अपेक्षाकृत कम है। वहीं जिन किसानों ने पहले रोपाई की थी, उनकी तैयार फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है। यमुनापार में देर से रोपाई, इसलिए नुकसान कम यमुनापार के कई इलाकों में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान धान की रोपाई देर से करते हैं। यहां अभी कई खेतों में धान पूरी तरह पका नहीं है। इसलिए बारिश और तेज हवा का असर गंगापार के मुकाबले कम दिखाई दे रहा है। इसके उलट सोरांव और फूलपुर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा होने के कारण धान की रोपाई पहले हुई थी। यहां फसल पककर तैयार थी, इसलिए नुकसान भी ज्यादा हुआ है। किसान बोले- चार महीने की मेहनत कटाई से पहले बर्बाद हो गई सोरांव क्षेत्र के किसान रंजीत पटेल ने बताया कि उनकी करीब डेढ़ बीघा जमीन में लगी धान की फसल तेज बारिश और हवा से पूरी तरह गिर गई है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में अच्छी बारिश होने से फसल अच्छी थी और इस बार पैदावार भी बेहतर होने की उम्मीद थी। लेकिन अचानक हुई बारिश ने पूरी उम्मीद खराब कर दी। अब वे गिरी हुई फसल को बांधकर दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि कुछ फसल बचाई जा सके। किसान मुन्नी लाल ने बताया कि वे छोटे किसान हैं और परिवार का सालभर का खर्च खेती से ही चलता है। जून में रोपी गई उनकी धान की फसल पककर तैयार हो गई थी। पिछले दो-तीन दिनों की तेज बारिश और हवा से करीब 10 से 20 बिस्सा फसल गिरकर खराब हो गई। उन्होंने बताया कि रोपाई में करीब 2 हजार रुपए मजदूरी और 1,400 रुपए जुताई समेत करीब 4 हजार रुपए खर्च हुए थे। फसल गिरने से अब परिवार के सामने अनाज की समस्या खड़ी होने की चिंता है। दो बीघे की फसल गिरी, 10-15 हजार की लागत डूबी पमई हुसामगंज, कोड़ापुर निवासी किसान सुरेश कुमार पाल ने बताया कि लगातार बारिश और तेज हवाओं से उनकी करीब दो बीघे की धान की फसल पूरी तरह गिर गई है। उन्होंने बताया कि फसल में मजदूरी, बीज, खाद और अन्य खर्च मिलाकर करीब 10 से 15 हजार रुपए की लागत आई थी। चार महीने की मेहनत के बाद जब फसल तैयार हुई तो बारिश और हवा ने उसे जमीन पर गिरा दिया। अब लागत निकलने और पैदावार बचने की उम्मीद भी कम दिखाई दे रही है। किसानों की चिंता- सालभर की रोटी इसी फसल से किसानों का कहना है कि धान की खेती उनके परिवार की सालभर की जरूरत पूरी करती है। चार महीने तक खेत में मेहनत, मजदूरी, बीज, खाद और सिंचाई पर खर्च करने के बाद जब फसल कटाई के लिए तैयार हुई तो बारिश ने नुकसान कर दिया। किसानों का कहना है कि यदि गिरी हुई फसल सड़ गई तो उनके सामने अगले कई महीनों तक आर्थिक और अनाज की समस्या खड़ी हो सकती है। प्रयागराज में 20% फसल प्रभावित होने का अनुमान कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस चौहान के अनुसार, जिले में गंगापार और यमुनापार को मिलाकर करीब 20% फसल प्रभावित होने का अनुमान है। इनमें सबसे ज्यादा नुकसान सोरांव क्षेत्र में हुआ है। इसकी वजह यहां धान की रोपाई पहले होना और फसल का समय से पककर तैयार हो जाना है। वहीं यमुनापार में देर से रोपाई होने के कारण नुकसान अपेक्षाकृत कम है।

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